मलक्का जलडमरूमध्य को अपने प्रभाव क्षेत्र में लेने की चीन की योजना को गहरा झटका है। खबरों के मुताबिक मलेशिया के मलक्का राज्य की सरकार ने साढ़े दस अरब डॉलर के उस ठेके को कुछ दिन पहले रद्द कर दिया, जो मलक्का गेटवे प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए एक निजी कंपनी को दिया गया था। इस निजी कंपनी ने चीन की कंपनियों को इसमें भागीदार बना लिया था। उनमें एक चीन की सरकारी कंपनी भी थी।
इस परियोजना के तहत मलक्का जलडमरूमध्य में तीन कृत्रिम द्वीप बनाए जाने थे। इसके अलावा एक बंदरगाह का निर्माण भी होना था। इस परियोजना को लेकर काफी समय से मलेशिया में तीखी बहस चल रही थी।
मलक्का सरकार के बयान में कहा गया है कि स्थानीय डेवलपर कंपनी केएज डेवलपमेंट एसडीएन परियोजना को पूरा करने में नाकाम रही। उसे बीते 3 अक्तूबर तक इस परियोजना को पूरा करने का ठेका दिया गया था। केएज कंपनी को 2016 में ये ठेका मिला था। तब इस कंपनी ने चीन की पॉवर चाइना इंटरनेशनल ग्रुप से पार्टनरशिप बनाई। यह ग्रुप चीन की सरकारी स्टेट पॉवर इन्वेस्टमेंट कंपनी से संबंधित है। इसके अलावा शेनझेन यांतियान पोर्ट ग्रुप और रिझाव पोर्ट ग्रुप को भी इसमें शामिल किया गया।
मलेशिया के बुजुर्ग नेता महातिर मोहम्मद 2018 में फिर से देश के प्रधानमंत्री बने। वे अपने देश में चीन के बढ़ते प्रभाव के मुखर विरोधी रहे हैं। चीन के प्रभाव को वे आधुनिक दौर का उपनिवेशवाद भी बता चुके हैं। जानकारों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत बढ़ रहे प्रभाव का हिस्सा बन गया। इसके अलावा इसके कारण पर्यावरण को होने वाला नुकसान भी मलेशिया में एक बड़ा मुद्दा बन गया था।
महातिर की सरकार बनने के बाद मलेशिया ने 16.2 अरब डॉलर की ईस्ट कोस्ट रेल लिंक परियोजना और 2.3 अरब डॉलर के दो गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को भी रद्द कर दिया है। गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट का काम चीन के पेट्रोलियम पाइपलाइन ब्यूरो को सौंपा गया था।
मलाका गेटवे प्रोजेक्ट के तहत 546 हेक्टेयर के समुद्री तट पर एक नया शहर बनना था। इस शहर में बड़े मॉल, पर्यटन स्थल, थीम पार्क आदि बनने थे। मलेशियाई कंपनी केएजे का दावा है कि ये परियोजना चीन के महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं थी। लेकिन चीन के पूर्व परिवहन मंत्री यांग चुआंगतांग ने कहा था कि यह परियोजना मलाका में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को सपोर्ट करेगी।
निक्कई एशिया वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक केएज कंपनी ने ये साफ-साफ नहीं बताया कि इस परियोजना में चीन की कितने हिस्सेदारी है। इससे मलेशिया में विवाद खड़ा हुआ और आम धारणा बन गई कि यह चीन की परियोजना है। केएजे कंपनी ने कहा है कि उसने परियोजना से संबंधित स्टडी कराने और लाइसेंस लेने पर लाखों डॉलर खर्च किए। अब उसके सामने कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया है।
विश्लेषकों के मुताबिक मलक्का में चीन की दिलचस्पी जग-जाहिर रही है। चीन से आने वाला 80 फीसदी तेल और गैस मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। सिंगापुर का उस जलमार्ग का बड़ा प्रभाव है, जिसे अमेरिकी खेमे का देश समझा जाता है। इसलिए मलक्का परियोजना में अपनी भूमिका बढ़ाकर चीन उस मार्ग को अपने लिए सुरक्षित करना चाहता था।
अगर चीन मलेशिया के पूर्व और पश्चिम में कई तटों पर अपना प्रभाव बनाने और ईस्ट कोस्ट रेल रिंग से उन्हें जोड़ने में कामयाब हो जाता, तो वह सिंगापुर को दरकिनार कर मलक्का जलमार्ग पर अपनी पकड़ बना लेता। लेकिन फिलहाल उसकी इस महत्वाकांक्षा पर पानी फिर गया है।