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Maglev Train in China: चीन ने रचा नया कीर्तिमान, सिर्फ दो सेकंड में 700 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन

Sat, 27 Dec 2025 09:05 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

चीन की मैग्लेव ट्रेन विश्व रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए मात्र दो सेकंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की है। यह अब तक की सबसे तेज सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रिक मैग्लेव ट्रेन मानी जा रही है। टेस्ट के दौरान करीब 1000 किलो (एक टन) वजन वाली ट्रेन को 400 मीटर लंबे ट्रैक पर दौड़ाया गया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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चीन ने तेज रफ्तार परिवहन के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाई है। चीन की एक सुपरफास्ट मैग्नेटिक लेविटेशन (मैग्लेव) ट्रेन ने केवल दो सेकंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़कर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। यह अब तक की सबसे तेज सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रिक मैग्लेव ट्रेन मानी जा रही है।
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400 मीटर लंबे ट्रैक पर दौड़ी ट्रेन
यह परीक्षण चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया। इस टेस्ट के दौरान करीब 1000 किलो (एक टन) वजन वाली ट्रेन को 400 मीटर लंबे ट्रैक पर दौड़ाया गया। हैरानी की बात यह रही कि इतनी तेज रफ्तार छूने के बाद भी ट्रेन को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से रोक लिया गया।

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हवा में तैरती है ट्रेन
यह मैग्लेव ट्रेन पटरियों को छूती ही नहीं। इसमें लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट ट्रेन को ऊपर उठाकर हवा में तैराते हैं और आगे की ओर धक्का देते हैं। चूंकि पहियों और पटरी के बीच कोई घर्षण नहीं होता, इसलिए ट्रेन बेहद तेज़ रफ्तार से दौड़ पाती है। टेस्ट का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ट्रेन चांदी की बिजली की तरह पल भर में आंखों से ओझल हो जाती है। पीछे बस एक हल्की सी धुंधली लकीर रह जाती है, मानो कोई साइंस फिक्शन फिल्म का दृश्य हो।
 

रॉकेट लॉन्च तक की ताकत
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तकनीक से पैदा होने वाली तेज गति और ताकत इतनी ज्यादा है कि इसका इस्तेमाल रॉकेट लॉन्च के लिए भी किया जा सकता है। भविष्य में इसी तकनीक से शहरों के बीच सफर मिनटों में पूरा हो सकता है। यह तकनीक हाइपरलूप जैसी भविष्य की यात्रा प्रणालियों की राह भी खोलती है, जहां ट्रेनें वैक्यूम ट्यूब में बेहद तेज गति से चलेंगी।

अंतरिक्ष और विमानन में भी उपयोग
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (एससीएमपी) के अनुसार, इस सिस्टम ने अल्ट्रा-हाई-स्पीड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन, इलेक्ट्रिक सस्पेंशन गाइडेंस और सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट जैसी कई जटिल तकनीकी चुनौतियों को हल किया है। इस तकनीक का उपयोग भविष्य में अंतरिक्ष, रॉकेट और विमानन क्षेत्र में भी किया जा सकता है। इससे विमानों और रॉकेटों की उड़ान ज्यादा स्मूद होगी, ईंधन की खपत कम होगी और लागत भी घटेगी।
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10 साल की मेहनत का नतीजा
परियोजना से जुड़े प्रोफेसर ली जीए ने कहा कि इस सफलता से चीन में अल्ट्रा-हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रांसपोर्ट पर शोध और विकास को तेजी मिलेगी। वैज्ञानिकों की टीम पिछले 10 साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसी साल जनवरी में इसी ट्रैक पर ट्रेन ने 648 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की थी। करीब 30 साल पहले, इसी विश्वविद्यालय ने चीन की पहली मानव-सवार मैग्लेव ट्रेन बनाई थी। तब से लेकर अब तक, चीन इस तकनीक में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है।

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