फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को सीरिया पहुंचे। साल 2024 में बशर अल-असद को सत्ता से हटाए जाने के बाद, इस युद्धग्रस्त देश का दौरा करने वाले वह पहले बड़े पश्चिमी नेता बन गए हैं। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अप्रैल में सीरिया का दौरा किया था, लेकिन पश्चिमी यूरोप या उत्तरी अमेरिका से सीरिया पहुंचने वाले मैक्रों पहले नेता हैं।
यह दौरा मध्य पूर्व में शांति के समय हो रहा है। हाल ही में ईरान और लेबनान में एक महीने तक युद्ध चला था। सीरिया के बाद मैक्रों नाटो शिखर सम्मेलन के लिए तुर्की के अंकारा जाएंगे। सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक अहम बैठक होगी।
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दमिश्क हवाई अड्डे पर सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शिबानी ने मैक्रों का स्वागत किया। सीरिया की सरकारी समाचार एजेंसी साना ने एक जानकारी दी। इसके अनुसार, मैक्रों के साथ एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है। वे क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और निवेश के मौकों पर चर्चा करेंगे।
अपनी इस यात्रा को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'मैं सीरियाई जनता के प्रति फ्रांस की प्रतिबद्धता व्यक्त करने आया हूं। एक संप्रभु सीरिया के लिए, जो अपनी विविधता में एकजुट हो और अपने पड़ोसियों के साथ शांति बनाए रखे। आइए, मिलकर स्थिरता और शांति का एक नया अध्याय खोलें।'
मैक्रों के कार्यालय ने भी एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि, फ्रांस उन सभी का समर्थन करता है जो 'नया सीरिया' बनाने में मदद कर सकते हैं। यह 2011 के अरब स्प्रिंग की उम्मीदों के अनुरूप है। अरब स्प्रिंग मध्य पूर्व में राजनीतिक बदलाव और सुधार के लिए हुए बड़े विद्रोह का समय था।
मंगलवार को मैक्रों की कई बैठकें होंगी। सबसे पहले वे सीरियाई नागरिक समाज के सदस्यों से मिलेंगे। हालांकि, इसकी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। इसके बाद वे राष्ट्रपति भवन में अल-शरा से मिलेंगे। दोनों नेता आर्थिक बातचीत करेंगे और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करेंगे। अंत में दोनों एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
इससे पहले मई 2025 में मैक्रों ने पेरिस में अल-शरा की मेजबानी की थी। तब मैक्रों ने यूरोपीय और अमेरिकी नेताओं से दमिश्क पर लगे पुराने प्रतिबंध हटाने की अपील की थी। अब इनमें से ज्यादातर प्रतिबंध हटा लिए गए हैं।
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पेरिस ने सीरिया के नए नेतृत्व का हमेशा समर्थन किया। कई देश अल-शरा के इस्लामी शासन को लेकर शक में थे। अल-शरा पहले हयात तहरीर अल-शाम नाम के उग्रवादी समूह के प्रमुख थे। यह समूह पहले अल-कायदा से जुड़ा था। पश्चिमी देशों को महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की चिंता थी। वे यह भी सोच रहे थे कि क्या सीरिया में लोकतांत्रिक शासन आएगा।
सीरिया ने खुद को हाल के क्षेत्रीय संघर्षों से दूर रखा है। लेकिन 13 साल के युद्ध ने देश को बर्बाद कर दिया है। देश का बड़ा हिस्सा खंडहर बन चुका है और लाखों लोग गरीबी में चले गए हैं। इसे फिर से बनाने में सैकड़ों अरब डॉलर लगेंगे। सीरिया ने बड़े निवेश के लिए कई देशों और कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। लेकिन अभी तक ये योजनाएं जमीन पर नहीं उतरी हैं।