गो फर्स्ट ने 9 मई तक उड़ानें रद्द कर दी हैं। इस गंभीर संकट के लिए एयरलाइन ने अमेरिकी कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी (पीएंडडब्ल्यू) को कसूरवार बताया था। वहीं, अब जर्मन एयरलाइंस लुफ्थांसा ने भी गो फर्स्ट के बयान का समर्थन किया है।
गो फर्स्ट के सीईओ कौशिक खोना ने अपने कर्मचारियों से कहा कि एयरलाइन में आई गड़बड़ी का कारण प्रैट एंड व्हिटनी इंजन हैं। इनके बार-बार खराब होने की वजह से एयरलाइन में समस्या आई है। वहीं उन्होंने लीज देने वाले लोगों (पट्टेदार) द्वारा सख्ती करने की बात भी कही।
सीईओ ने कहा कि एयरलाइन का बेड़ा घटता जा रहा है। ऐसे में हम पट्टेदारों के भुगतान के लिए राजस्व उत्पन्न करने में असमर्थ हैं। ऐसे में पट्टेदार कठोर कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों को तसल्ली दी। उन्होंने कहा कि हम सभी कर्मचरियों को देखते हुए बहुत सावधानी और चिंता के साथ स्थिती को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिकी कंपनी का बयान
गौरतलब है, बुधवार यानी आज सुबह अमेरिकी कंपनी पीएंडडब्ल्यू ने कहा था कि प्रैट एंड व्हिटनी हमारे एयरलाइन ग्राहकों की सफलता के लिए प्रतिबद्ध है। हम सभी ग्राहकों के लिए डिलीवरी शेड्यूल को प्राथमिकता देना जारी रखते हैं। उसने आग कहा कि प्रैट एंड व्हिटनी गो फर्स्ट से संबंधित मार्च 2023 मध्यस्थता के फैसले का अनुपालन कर रही है। यह अब मुकदमेबाजी का मामला है। इसलिए हम आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
वहीं, पीएंडडब्ल्यू के अधिकारियों ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब गो फर्स्ट के साथ ऐसा कुछ हुआ है। उसका पहले भी प्रैट के प्रति अपने वित्तीय दायित्वों को खो देने का एक लंबा इतिहास रहा है।
यह है मामला
अमेरिकी कंपनी एंड व्हिटनी (पीएंडडब्ल्यू) ने मध्यस्थता फैसले का पालन किया होता तो वाडिया समूह की एयरलाइन कंपनी गो फर्स्ट गंभीर संकट में नहीं फंसती। सिंगापुर मध्यस्थता अदालत ने पीएंडडब्ल्यू को आदेश दिया था कि वह 27 अप्रैल तक कम से कम 10 अतिरिक्त लीज इंजन और दिसंबर 2023 तक प्रतिमाह अन्य 10 अतिरिक्त लीज इंजन कंपनी को देने के लिए सभी उचित कदम उठाए। पीएंडडब्ल्यू ने ऐसा नहीं किया। अगर प्रैट एंड व्हिटनी ने इन निर्देशों का पालन किया होता, तो गो फर्स्ट अगस्त-सितंबर 2023 तक पूर्ण संचालन में वापस आ जाता।
तीन वर्षों में प्रमोटरों ने डाले 3,200 करोड़ रुपये
प्रमोटरों ने पिछले तीन वर्षों में एयरलाइन में 3,200 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसमें से 2,400 करोड़ रुपये पिछले 24 महीनों में डाले गए हैं। इस साल अप्रैल में 290 करोड़ रुपये की और राशि डाली गई थी। स्थापना से अब तक 6,500 करोड़ रुपये का निवेश मालिकों ने किया है।
2005 में पट्टे के दो विमानों से शुरू हुई थी कंपनी
वाडिया समूह की कंपनी लंबे समय से पूंजी जुटाने के लिए निवेशकों से बात कर रही है पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। आईपीओ लाने के लिए भी सेबी के पास मसौदा जमा कराया गया है। गो फर्स्ट एयरलाइन की शुरुआत जेह वाडिया ने 2005 में बिना किसी विस्तृत योजना के शुरू की थी और उस समय दो विमान पट्टे पर लिया था।