1980 के दशक में शिकारियों और लकड़ी तस्करों के गिरोहों ने उसके कबीले के बाकी सभी लोगों को गोली से उड़ा दिया था। सिर्फ उसकी जान जैसे-तैसे बच सकी। ब्राजील सरकार के जनजाति संरक्षण न्यास के कई बार प्रयास के बावजूद उसने दुनिया के संपर्क में आने से इनकार कर दिया।
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ब्राजील में अमेजन के घने जंगल में मूल निवासी कबीले के एकमात्र सदस्य की भी मौत हो गई। दुनिया के सबसे अकेले व्यक्ति के रूप में मशहूर व्यक्ति को गड्ढा खोदकर पशुओं का शिकार करने के लिए भी जाना जाता रहा है।
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समुदाय के सभी लोगों की मौत के बाद उसने 26 साल अकेले गुजारे
1980 के दशक में शिकारियों और लकड़ी तस्करों के गिरोहों ने उसके कबीले के बाकी सभी लोगों को गोली से उड़ा दिया था। सिर्फ उसकी जान जैसे-तैसे बच सकी। ब्राजील सरकार के जनजाति संरक्षण न्यास के कई बार प्रयास के बावजूद उसने दुनिया के संपर्क में आने से इनकार कर दिया। नतीजे में उसे ढाई दशक से ज्यादा का समय अकेले जीना पड़ा। उसे दुनिया के सबसे अकेले व्यक्ति के नाम से भी पहचाना जाता रहा। इस इंडियन आदिवासी कबीले या व्यक्ति का नाम क्या था, कोई कभी नहीं जान सका।
कई बार शिकारियों और लकड़ी के तस्करों के हमलों के बाद ब्राजील सरकार ने संसद में कानून बनाकर उसके निवास के 31 वर्ग मील इलाके को अन्य लोगों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया था।
शिकारियों ने कबीले के 30 लोगों की हत्या कर दी थी।
आदिवासी ने इशारों में जता दिया था कि उसे अकेले रहना है और कोई पास आने की कोशिश न करे। इसलिए जनजाति संरक्षण न्यास के कर्मचारी प्रायः शिकार और अन्य कामकाज के औजारों के साथ बीज उसके रिहायश के इलाके में रखकर लौट आते थे। उसकी गतिविधियों पर दूर से ही निगरानी की जाती रही।
बीते बुधवार को संरक्षण न्यास के अधिकारियों ने घास-फूस से बने घर में उसे मृत पाया। मौत प्राकृतिक वजहों से हुई।
एक अधिकारी ने बताया, दुनिया के सबसे अकेले व्यक्ति को उसके घर में ही दफनाया जाएगा।