लंदन के मेयर सादिक खान ने ब्रिटेन की राजधानी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने के लिए भारतीय कंपनियों और छात्रों को चीन के समान वरीयता मानदंड की पैरवी की है। पाक मूल के सादिक ने ब्रिटिश सरकार की आव्रजन नीतियों की आलोचना की। उन्होंने, ‘लंदन इज ओपन मैसेज’ यानी लंदन सबके लिए खुला है, यह बात दोहराते हुए कहा कि मौजूदा आव्रजन नीतियां निवेश वृद्धि और भारत से आने वाले छात्रों की राह में बाधक हैं।
भारतीय व्यापार लंदन में 50 हजार लोगों के रोजगार का जरिया है और इस शहर में यह दूसरे सबसे बड़े विदेशी निवेशक हैं। लंदन एंड पार्ट्नर्स (एल एंड पी) के आंकड़ों के मुताबिक लंदन में भारत से आने वाला एफडीआई 2018 में 2017 के मुकाबले 255 फीसदी बढ़ा है। सालाना ‘एशियन वॉयस चैरिटी अवॉर्ड’ समारोह के दौरान सादिक खान ने कहा, ‘ब्रिटिश सरकार को भारतीय व्यवसायों और छात्रों के लिए लंदन की राह आसान करनी होगी। सरकार ने चीन के लिए थोड़े बदलाव किए हैं, उनका मैं स्वागत करता हूं लेकिन भारत को भी ऐसी तरजीह दी जानी चाहिए।’
उन्होंने कहा कि अभी भारत से प्रतिभाशाली छात्र लंदन आते नहीं दिख रहे हैं। आपको बता दें कि चीन को उन देशों की फेहरिस्त में रखा है, जिनके लिए ब्रिटिश छात्र वीजा नियम आसान किए गए हैं।