जर्मनी में कोरोना वायरस के संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि 28 जनवरी को हुई थी। कुछ दिन पहले फ्रांस में भी तीन मामलों की पुष्टि हो चुकी थी। दोनों देशों के प्रथम संक्रमित चीन से आए थे। भारत में पहले मामले की पुष्टि 30 जनवरी को हुई।
जर्मनी की सरकार ने जब देखा कि कोरोना वायरस से होने वाली कोविड-19 बीमारी की रोकथाम के उपाय काम नहीं आ रहे हैं, तो 16 मार्च को बैंकों, डाकघरों, सुपरबाजारों, डॉक्टरों के दवाखानों, दवा की दुकानों, पेट्रोलपंपों और जरूरी सेवाओं को छोड़कर सब बंद करने का आदेश दिया।
स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय, संग्रहालय, सिनेमाघर बंद हो गए। पर रेल, बस और विमान सेवाएं चालू रखी गईं। लोगों से कहा गया कि सार्वजनिक जगहों पर उन्हें दूसरों से कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी रखनी होगी। सबको यथासंभव घर में ही रहना होगा।
सांस्कृतिक गतिविधियों, होटल, रेस्त्रां और पर्यटन उद्योग का दीवाला पिटना अभी से सुनिश्चित है। सबसे अधिक निर्यात-आय दिलाने वाले ऑटोमोबाइल, मशीन निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों को भी भारी आंच पहुंचेगी। अनुमान है कि कोरोना की मार से 18 लाख लोग बेरोज़गार हो सकते है। देश में साढ़े पांच प्रतिशत बोरोज़ागारी दर पहले से ही है।
भारत से भिन्न जर्मनी में एकसमान ‘लॉकडाउन’ नहीं है। सभी मंत्रालय एवं कार्यालय बंद दरवाजों के पीछे काम कर रहे हैं। जनसाधारण उनसे टेलीफोन पर संपर्क कर सकते हैं। ट्रेनें, ट्रॉम, मेट्रो और बसें भी चल रही हैं, हालांकि सामान्य दिनों की अपेक्षा आधी।
महामारी से बचने के आपातकालीन नियमों की अनदेखी करने वालों को भारी अर्थदंड और जेल तक की सजा मिल सकती है। इसके बावजूद एक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, दो-तिहाई जर्मन निजी स्वतंत्रताओं में और अधिक कटौती को भी राजी हैं। केवल 8 प्रतिशत जर्मन मानते हैं कि सरकार जरूरत से ज्यादा कठोरता दिखा रही है।