पाइप के जरिए होने वाली रूसी प्राकृतिक गैस की सप्लाई रुकने के बाद यूरोप में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की बढ़ी मांग का बहुत खराब असर दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया पर हुआ है। एलएनजी के महंगा हो जाने के कारण इस क्षेत्र के कई देशों के लिए इसे खरीदना मुश्किल हो गया है। इसलिए ये देश फिर से कोयला पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं।
इस बात पर रोशनी मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में हुए सम्मेलन- एनर्जी एशिया-2023 के दौरान पड़ी। सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि रूस पर प्रतिबंध लगाने के बाद से यूरोप एलएनजी पर अधिक निर्भर हो गया। एलएनजी सप्लायरों से यूरोपीय देश महंगी दरों पर यह गैस खरीदने लगे। इस कारण सप्लायरों ने एलएनजी के दाम बढ़ा दिए। दुनिया की प्रमुख ऊर्जा व्यापार कंपनी वाइटोल के सीईओ रसेल हार्डी ने कहा- ‘यूरोप में रूस से पाइप के जरिए आने वाली गैस की सप्लाई अब लगभग पूरी रुक चुकी है। ऐसे में लाजिमी है कि वह अधिक से अधिक एलएनजी खरीदना चाहता है।’
विशेषज्ञों ने बताया कि यूरोप में बढ़ी मांग के कारण एशिया को स्थायी रूप से होने वाली गैस की सप्लाई भी बाधित हो गई है। एनर्जी एशिया-2023 सम्मेलन के दौरान कई विशेषज्ञों ने गैस कारोबार के भावी ट्रेंड का अनुमान लगाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अभी भी इस मामले में स्थिति ने ठोस रूप नहीं लिया है। मगर यह तय है कि आने वाले समय में गैस की महंगाई जारी रहेगी।
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अगस्त में एलएनजी की कीमत 70 डॉलर बीटीयू तक पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई। इस वर्ष जनवरी से मार्च तक एलएनजी की बेंचमार्क (जापान/कोरिया मार्केट- जेकेएम) कीमत औसतन 18 डॉलर बीटीयू तक गिर गई। लेकिन सम्मेलन में आए विशेषज्ञों ने अंदेशा जताया कि अगर अगली सर्दियों में यूरोप में अधिक ठंड पड़ी, तो एक बार फिर से एलएनजी की कीमत में भारी उछाल आ सकता है।
वैसे भी एशिया में एलएनजी की खपत काफी गिर चुकी है। साल 2021 में इस क्षेत्र में एलएनजी की कुल खपत 27 करोड़ 20 लाख टन थी। जबकि 2022 में यह 25 करोड़ 20 लाख टन रह गई। हार्डी ने कहा- ‘स्पष्टतः 2021 की तुलना में एशिया को आज पहले से कम गैस मिल पा रही है।’
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप में गैस का संकट खड़ा हुआ था। इस संकट से उबरने की कोशिश में यूरोप ने एलएनजी की खरीदारी बढ़ाई। कतर से उसने खरीदारी के नए करार किए, जबकि कतर उसके पहले एशिया के प्रमुख सप्लायरों में था। यूरोप ने अमेरिका से भी एलएनजी गैस की बड़े पैमाने पर खरीदारी की। इसका असर कुछ निम्न आय वाले देशों पर पड़ा।
एसएंडपी ग्लोबल कंपनी में वैश्विक गैक रणनीति विभाग के प्रमुख माइक स्टोपार्ड ने सम्मेलन में कहा- ‘यूरोप ने स्थिति को संभाला और अपने यहां अंधेरा छाने से बचा लिया। लेकिन उन्होंने अंधेरे को दूसरी जगह पर धकेल दिया है। इस अंधेरे का साया एशिया- खास कर दक्षिण एशिया पर मंडरा रहा है।’