दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ एस्सोप गुलाम पहाड़ का गुरुवार को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनको यहां रंगभेद संघर्ष के लिए जाना जाता था। उनकी मृत्यु पर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने दुख व्यक्त किया।
दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ एस्सोप गुलाम पहाड़ का गुरुवार को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनको यहां रंगभेद संघर्ष के लिए जाना जाता था। उनकी मृत्यु पर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम अनुभवी भारतीय मूल के राजनीतिक कार्यकर्ता की मृत्यु से दुखी है।
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एस्सोप पहाड़ ने 1999 से 2008 तक उस समय के राष्ट्रपति थाबो मबेकी के अधीन मंत्री के रूप में कार्य किया और वहां से काम करने के बाद सेवानिवृत्त हुए। उस पद पर, उन्होंने 1994 में राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला द्वारा शुरू की गई नई लोकतांत्रिक सरकार के नीति विकास में प्रभावशाली भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति रामफोसा ने कहा कि एस्सोप पहाड़ एक विचारक और रणनीतिकार थे, उन्होंने यहां लोकतंत्र मजबूत करने के लिए काफी योगदान दिया। पहाड़ को 2015 में प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार भी मिला था। जोहान्सबर्ग में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि पहाड़ को सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान, रंगभेद के खिलाफ संघर्ष में उनकी भूमिका और भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मजबूत संबंधों की वकालत के लिए याद किया जाएगा।
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करीबी पारिवारिक मित्र और साथी राजनेता इस्माइल वादी ने कहा कि पहाड़ का उच्च पद पर रहते हुए भी उनका संपर्क सामान्य था। उन्होंने जमीनी स्तर के साथ करीबी संपर्क बनाए रखा और अक्सर लेनासिया, जोहान्सबर्ग और डरबन में स्थानीय समुदायों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाया।
पहाड़ के परिवार में सप्ताह भीतर यह दूसरी मौत थी। इससे पहले उनके भाई जुनेद पहाड़ की मौत हो गई थी। एस्सोप पहाड़ पांच भाई हैं। सभी भाई अपने पिता गुलाम हुसैन इस्माइल पहाड़ के नक्शेकदम पर चलते हुए रंगभेद विरोधी संघर्ष में सक्रिय थे। पिता ट्रांसवाल भारतीय कांग्रेस और दक्षिण अफ्रीकी भारतीय कांग्रेस के एक प्रमुख सदस्य थे। वहीं उनकी मां अमीना भी अपनी राजनीतिक सक्रियता के लिए प्रसिद्ध थीं।