लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात का समर्थन करते हुए कहा कि, यूक्रेन में युद्ध खत्म करने के लिए की जाने वाली किसी भी बातचीत में कीव की पूरी भागीदारी होनी चाहिए और क्षेत्र के देशों को अपने रक्षा खर्च को बढ़ाना होगा ताकि भविष्य में रूस के आक्रमण को रोका जा सके। लिथुआनिया के राष्ट्रपति ने एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में कहा कि अगर युद्धविराम के बाद उचित सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो रूस अपनी सेना को फिर से संगठित कर भविष्य में और आक्रमण करने की योजना बना सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर युद्धविराम भी हो जाता है, तो यह मान लेना कि रूस चुप बैठ जाएगा, सही नहीं होगा। वे इस मौके का फायदा उठाकर अपनी सेना को और मजबूत करेंगे और फिर से हमला कर सकते हैं। और तब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि अगला निशाना कौन होगा – यूक्रेन? या फिर बाल्टिक देश?'।
रूस का डर और नाटो की भूमिका
लिथुआनिया, जो 1990 तक सोवियत संघ का हिस्सा था, यूक्रेन में जारी युद्ध और अपने पड़ोसी रूस की आक्रामकता को लेकर बहुत चिंतित है। देश की भौगोलिक स्थिति इसे और असुरक्षित बनाती है, क्योंकि यह एक तरफ रूस के कालिनिनग्राद क्षेत्र और दूसरी तरफ बेलारूस से घिरा हुआ है। नौसेदा ने कहा, 'हम इस दुनिया के ऐसे हिस्से में रहते हैं, जहां कभी भी खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते। हमारे पड़ोस में रूस है, और वह अगले सौ-दो सौ वर्षों तक वहीं रहेगा। इसलिए, हमें हमेशा सतर्क रहना होगा और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।' उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि 'पुतिन की चुनौती पूरे नाटो के लिए है।'
यूक्रेन को बातचीत में शामिल करना जरूरी
लिथुआनिया नाटो का पहला सदस्य देश बन गया है जिसने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से तय किए गए जीडीपी के 5% रक्षा बजट के लक्ष्य को अपनाने का वादा किया है। ट्रंप पहले भी नाटो के देशों को अधिक रक्षा खर्च करने के लिए कह चुके हैं और धमकी दी थी कि जो देश तय लक्ष्य को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें अमेरिका की सुरक्षा मदद नहीं मिलेगी। हालांकि, लिथुआनिया और कुछ अन्य पूर्वी यूरोपीय देश इस खर्च को जरूरी मान रहे हैं। नौसेदा ने कहा कि यूक्रेन में शांति स्थापित करने के किसी भी प्रयास में कीव को पूरी तरह शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी, 'अगर यूक्रेन के बिना किसी बंद कमरे में शांति समझौता किया जाता है, तो यह पूरी तरह अस्वीकार्य होगा। यूक्रेन ने इस युद्ध में बहुत बड़ी कुर्बानियां दी हैं – हजारों लोगों की जान गई है, घर और बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है। ऐसे में, यूक्रेन को अपने भविष्य की शांति शर्तें तय करने का पूरा अधिकार है।' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यही समझते हैं – कोई भी शांति वार्ता यूक्रेन के बिना नहीं हो सकती।'
बाल्टिक सागर में हो रहे रहस्यमयी हमले
लिथुआनिया और उसके पड़ोसी देशों के लिए एक और चिंता का विषय है 'बाल्टिक सागर में समुद्र के नीचे बिछी केबलों और गैस पाइपलाइनों पर हो रहे हमले'। अक्तूबर 2023 से अब तक कम से कम 11 समंदर के नीचे की केबल क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। हाल ही में, लातविया और स्वीडन को जोड़ने वाली फाइबर ऑप्टिक केबल भी टूट गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नौसेदा ने कहा, 'अब समय आ गया है कि हम अपनी ताकत दिखाएं।' नाटो ने इस खतरे से निपटने के लिए एक नई 'बाल्टिक सेंट्री' मिशन की शुरुआत की है, जो बाल्टिक सागर में अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करेगा।
लिथुआनिया का बढ़ता रक्षा खर्च
लिथुआनिया नाटो के उन देशों में से एक है जो अपनी जीडीपी का सबसे बड़ा हिस्सा रक्षा बजट में खर्च कर रहा है। हालांकि, देश में कुछ लोग इसे लेकर आपत्ति जता रहे हैं। लेकिन नौसेदा का मानना है कि 'हमारा पहला कर्तव्य अपनी रक्षा करना है।' उन्होंने कहा, 'हम नाटो के सहयोग पर भरोसा कर सकते हैं, लेकिन यह सोचना कि कोई और हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा, नासमझी होगी। हमें अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी होगी।'