उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने लिथुआनिया में बोलते हुए कहा कि सभी देशों को आतंकवाद रोकने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे और साथ ही उन राष्ट्रों को अलग-थलग कर देना चाहिए जो आंतकवाद को समर्थन और सहायता प्रदान करते हैं।
लिथुआनिया के राष्ट्रपति गीतानस नोसदा के साथ शनिवार को उन्होंने एक संवादाता सम्मेलन में कहा कि आज विश्व में आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। सभी राष्ट्रों को एक साथ आकर आतंकवाद के विरूद्ध अपने सामूहिक प्रयासों को तेज करना होगा और साथ ही आतंकवाद को खत्म करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
साथ ही उन राष्ट्रों को अलग-थलग करना चाहिए जो आतंकवाद को पालते हैं। उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी की कि भारत सरकार ने ई-वीजा की सुविधा लिथुआनिया के लोगों के लिए भी बढ़ा दिया है।
भारत में आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए लिथुआनिया के कारोबारियों से आग्रह करते हुए, उप राष्ट्रपति ने कहा कि हम लिथुआनिया के साथ अपने ऊर्जा परिवर्तन भागीदार के रूप में भी खुश होंगे क्योंकि भारत 2022 तक सौर ऊर्जा से 100 गीगावॉट उत्पन्न करने की योजना बना रहा है।
दोनों देशों ने सांस्कृतिक, कृषि क्षेत्र और कानूनी सहयोग के लिए तीन सहमति ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। भारत की तरफ से वेंकैया नायडू और लिथुआनिया की तरफ से नोसदा से ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किया।
नायडू लिथुआनिया, लताविया और एस्टोनिया के यात्रा पर हैं। वह अपनी यात्रा के पहले चरण में शनिवार को लिथुआनिया पहुंचे। उपराष्ट्रपति को देश के विदेश मंत्री लिनास लिंकेविसियस और भारत के राजदूत त्सांग नामग्याल और अन्य लोगों द्वारा स्वागत किया गया।
नायडू लिथुआनिया के राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना हुए, जहां उनका राष्ट्रपति नोसदा ने स्वागत किया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के लिए एक-एक वार्ता और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की।
वार्ता के दौरान, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को आज की वास्तविकताओं पर विचार करने और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए अधिक प्रतिनिधित्व बनाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।