खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और दक्षिणी सीमा पर जंग से जूझ रहे लेबनान में शनिवार को नई सरकार का गठन हो गया। पिछले महीने प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए नवाफ सलाम की 24 सदस्यों वाली नई कैबिनेट में मुस्लिम और ईसाई दोनों को बराबर-बराबर जगह दी गई है। साल 2022 के बाद से लेबनान में पहली पूर्ण सरकार है, जिसने कार्यभार संभाला है।
पिछले महीने जनवरी में पूर्व आर्मी चीफ जोसेफ औन लेबनान के नए राष्ट्रपति चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने सलाम को बतौर प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। उन्होंने कार्यवाहक सरकार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। शक्तिशाली आतंकी संगठन हिज्बुल्ला ने प्रधानमंत्री के रूप में सलाम और राष्ट्रपति के रूप में जोसेफ का समर्थन नहीं किया है। सरकार में शिया मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर हिज्बुल्ला की प्रधानमंत्री सलाम से बातचीत हुई है। लेबनान की नई सरकार ने हिज्बुल्ला के करीबी नेताओं से दूरी बना ली है।
लेबनान अब सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों के साथ नजदीकी बढ़ा रहा है। एक दशक से ज्यादा समय से हिज्बुल्ला लेबनान में एक शक्तिशाली राजनीतिक और सैन्य ताकत बना हुआ है। हालांकि, हमास को लेकर इस्राइल के साथ लंबी चली जंग में इस ताकतवर शिया संगठन हिज्बुल्ला की कमर टूट चुकी है। उसके कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं और वह पहले जैसा शक्तिशाली संगठन नहीं रहा।
नई सरकार के सामने ढेरों चुनौतियां
राजनयिक और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के पूर्व अध्यक्ष प्रधानमंत्री सलाम ने देश की न्यायिक प्रणाली में सुधार करने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का वादा किया है। बैंकिंग सेक्टर तबाह हो चुका है और देश की बड़ी आबादी गरीबी में जीवन बिताने पर मजबूर है। अर्थव्यवस्था को पटरी लाने के अलावा नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस्राइल और हिज्बुल्ला के बीच महीनों चली जंग के कारण बर्बाद हो चुके दक्षिणी क्षेत्र का बुनियादी विकास करना है। जंग की वजह से लाखों लोगों को दक्षिणी क्षेत्र से पलायन करना पड़ा, लेकिन अब धीरे-धीरे लोग अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। हालांकि, वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बर्बाद हो चुकी हैं।