बदहाल होती पाकिस्तान की कानून व्यवस्था
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विश्व न्याय परियोजना (डब्ल्यूजेपी) कानून के नियम सूचकांक में व्यवस्था और सुरक्षा के संबंध में पाकिस्तान को 142 देशों में 140वां स्थान दिया गया है, जिससे यह दुनिया का तीसरा सबसे खराब देश बन गया है। डब्ल्यूजेपी द्वारा प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में विभिन्न कारकों के आधार पर देशों का मूल्यांकन किया गया है। इसमें सरकारी शक्तियों पर बाधाएं, भ्रष्टाचार, खुली सरकार, मौलिक अधिकार, व्यवस्था-सुरक्षा, नियामक प्रवर्तन, नागरिक न्याय और आपराधिक न्याय शामिल हैं।
डॉन अखबार के अनुसार, व्यवस्था और सुरक्षा को तीन कारकों द्वारा मापा जाता है, जिनमें अपराध नियंत्रण, सशस्त्र संघर्षों से सुरक्षा, और नागरिक विवादों को सुलझाने के लिए हिंसा का उपयोग शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था में भारी गिरावट आई है। रिपोर्ट न केवल राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को दर्शाती है, बल्कि उस सरकार पर भरोसे के टूटने को भी दर्शाती है, जिसका काम देश की अखंडता को बनाए रखना है।
माली और नाइजीरिया ही ऐसे देश हैं जो कानून और सुरक्षा के मामले में पाकिस्तान से नीचे हैं। पाकिस्तान को सरकारी शक्तियों पर बाधाओं के लिए 103वां, भ्रष्टाचार के लिए 120वां, खुली सरकार के लिए 106वां, मौलिक अधिकारों के लिए 125वां, नियामक प्रवर्तन के लिए 127वां, नागरिक न्याय के लिए 128वां और आपराधिक न्याय के लिए 98वां स्थान दिया गया है। एजेंसी
मानवाधिकार, न्याय प्रणाली में गिरावट
डब्ल्यूजेपी के सह-संस्थापक और अध्यक्ष विलियम एच न्यूकॉम ने कहा, लगातार सात वर्षों तक कानून के शासन में गिरावट के बाद, नकारात्मक चीजों पर ध्यान केंद्रित करना आसान हो सकता है। लेकिन ऐसा करना भ्रष्टाचार विरोधी उपलब्धियों और विश्व स्तर पर न्याय प्रणालियों में सुधार के लिए की जा रही कड़ी मेहनत की अनदेखी होगी। डॉन के अनुसार, यह रिपोर्ट पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और न्याय प्रणाली में गिरावट का खुलासा करती है।