आजादी मिलने के बाद से अब तक श्रीलंका की अर्थव्यवस्था इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। श्रीलंका पर चीन, जापान, भारत और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का भारी कर्ज है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण वो अपने कर्जों की किस्त तक नहीं दे पा रहा है।
श्रीलंका के हाल हर बीतते दिन के साथ बेहाल होते जा रहे हैं। चीनी कर्ज के जाल में फंसकर इस द्वीपीय देश की अर्थव्यवस्था घ्वस्त हो गई है और लोग खाने-पीने के लिए भी मोहताज है। जरूरी सामानों का आयात बाधित होने के चलते महंगाई अपने चरम पर पहुंच गई है। आलम यह है कि लोग अनाज व अन्य जरूरी दैनिक सामान खरीदने के लिए अपने गहने बेचने को मजबूर हो गए हैं।
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां के कारोबारियों का कहना है कि उन्होंने श्रीलंका में ऐसा संकट पहले कभी नहीं देखा। उनका कहना है कि देश की मुद्रा में गिरावट के बाद गहनों को खरीदने के बजाय बेचने वालों की तादात बढ़ गई है।
आजादी मिलने के बाद से अब तक श्रीलंका की अर्थव्यवस्था इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। श्रीलंका पर चीन, जापान, भारत और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का भारी कर्ज है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण वो अपने कर्जों की किस्त तक नहीं दे पा रहा है। वहीं, श्रीलंकाई रुपया सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को वहां एक श्रीलंकाई रुपया की कीमत 315 डालर थी। इतना ही नहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 2.05 लाख श्रीलंकाई रुपये तक पहुंच गई है।
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वित्त मंत्री अली साबरी का कहना है कि आर्थिक संकट से पार पाने और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति को फिर से दुरुस्त करने के लिए श्रीलंका को अगले छह महीने में तीन अरब डालर की मदद की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि ये बहुत मुश्किल है। साबरी ने अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी से कहा है कि श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) से बातचीत के लिए तैयार हैं। वो अंतरराष्ट्रीय संप्रभु बांड के पुनर्गठन, ऋण भुगतान स्थगन और जुलाई में एक अरब डालर के कर्ज की अदायगी के लिए और वक्त मांगने का प्रयास कर रहा है।