फिलीपींस में अगला राष्ट्रपति बनने की होड़ में सबसे आगे चल रहे उम्मीदवार के चीन समर्थक रुख अपना लेने से इस चुनाव में पूरे पूर्वी एशिया की दिलचस्पी बन गई है। इस वजह से इस चुनाव को अमेरिका के लिए भी महत्त्वपूर्ण समझा जा रहा है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान अगले नौ मई को होगा।
मार्कोस के बेटे मैदान में
इस चुनाव में जारी ताजा जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक पूर्व तानाशाह मार्कोस के बेटे फर्डिनैंड मार्कोस सबसे आगे चल रहे हैं। मार्कोस को निवर्तमान राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते का भी समर्थन हासिल है। दुतेर्ते भी अपने तानाशाही रुझान के लिए चर्चित रहे हैँ। दुतेर्ते ने अपने शासनकाल में अमेरिका से फिलीपींस के परंपरागत संबंधों की अनदेखी करते हुए चीन से निकट रिश्ते बनाए। अब मार्कोस इस दिशा में और भी आगे बढ़ने की बात खुलेआम कह रहे हैं।
मार्कोस ने हाल में प्रेस को कई इंटरव्यू दिए हैं। इनमें उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति बनने पर वे 2016 में आए हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय पंचाट के फैसले को दरकिनार कर देंगे। इस फैसले में दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के बीच चल रहे विवाद में फिलीपींस की जीत हुई थी। तब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कहा था कि दक्षिण चीन सागर में उस स्थान पर चीन के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है, जिस पर फिलीपींस का भी दावा है।
एक रेडियो चैनल को दिए इंटरव्यू में मार्कोस ने कहा कि चीन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल का फैसला असरदार नहीं है। इस समस्या के हल का एकमात्र व्यावहारिक विकल्प यह है कि चीन की सहमति से इसे हल किया जाए। उन्होंने कहा- ‘यह तथ्य है कि चीनी दूतावास के लोग मेरे मित्र हैं और उनके साथ मेरी इस मुद्दे पर बातचीत होती रही है।’ मार्कोस ने कहा- हमें युद्ध की बात नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह कोई विकल्प नहीं है। हमें चीन के साथ संपर्क बनाते हुए ही आगे बढ़ना होगा।
चीन से वार्ता में अमेरिकी मध्यस्थता नहीं
अपने ही देश के हितों के खिलाफ मार्कोस की इस खुली दावेदारी ने पर्यवेक्षकों को हैरत में डाल रखा है। उन्हें इस बात से और भी अधिक अचरज हुआ है कि ऐसी बातें करने के बावजूद मार्कोस तमाम उम्मीदवारों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय बने हुए हैं। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में तो मार्कोस ने यहां तक कह दिया कि चीन के साथ बातचीत के मामले में किसी अमेरिकी पेशकश को वे ठुकरा देंगे। उन्होंने कहा- ‘समस्या और चीन और अमेरिका के बीच है। अगर अमेरिका हमारे बीच आता है, तो उसकी नाकामी तय है।’
मार्कोस के अलावा बाकी सभी उम्मीदवारों ने चीन के खिलाफ उग्र राष्ट्रवादी रुख अपना रखा है। उन उम्मीदवारों में उप राष्ट्रपति लेनी रोब्रेडो, सीनेटर मैनी पैकियाओ, पैनफिलो लैकसन और इस्को मोरेनो शामिल हैं। वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्कोस के पिता ने भी अपने शासनकाल में चीन के साथ निकट रिश्ते बना रखे थे। लेकिन वे निर्वाचित राष्ट्रपति नहीं थे। वैसे निवर्तमान राष्ट्रपति दुतेर्ते ने भी चीन से अच्छे संबंध रखे। अब उनकी बेटी सारा दुतेर्ते को मार्कोस ने अपने साथ उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना रखा है। इस जोड़ी के जीतने की संभावना सबसे ज्यादा समझी जा रही है।