गाजा पट्टी में भुखमरी से हालात विकट हो गए हैं। बच्चे भूख से तड़प-तड़प कर मर रहे हैं, और वयस्कों को रोजाना भूख मिटाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। ऐसी ही एक कहानी है पांच महीने की बच्ची जैनब अबू हलीब की, जिसने भूख के चलते रो-रोकर दम तोड़ दिया। मां एसरा अबू हलीब ने अपनी पांच महीने की बेटी को आखिरी बार चूमा और रो पड़ी। बच्ची का वजन अब उसके जन्म के समय से भी कम रह गया था। इस बच्ची की मौत ने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया है।
गाजा की एक धूप वाली सड़क पर, जैनब की छोटी सी लाश 21 महीने के युद्ध और खाने की चीजों पर इस्राइली रोक के बाद हुई एक और भूख से मौत का उदाहरण बन गई। बच्ची को शुक्रवार को गाजा के नासिर अस्पताल लाया गया था, लेकिन तब तक वह मर चुकी थी। एक कर्मचारी ने उसकी मिकी माउस वाली शर्ट हटाकर उसकी खुली आंखों पर रख दी। उसकी पतली टांगें और उभरी हुई हड्डियां देखकर साफ लग रहा था कि वह बहुत कुपोषित थी।
तीन किलो से ज्यादा था जैनब के जन्म का वजन
बच्ची की मां एसरा ने बताया कि जैनब का जन्म का वजन 3 किलो से ज्यादा था, लेकिन जब उसकी मौत हुई, तब उसका वजन 2 किलो से भी कम रह गया था। बच्ची को एक सफेद चादर में लपेटकर दफनाने की तैयारी की गई। उसके लिए नमाज पढ़ी गई और अल्लाह से दुआ की गई।
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अब तक 85 बच्चों ने भूख और कुपोषण से तोड़ा दम
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि युद्ध के दौरान अब तक 85 बच्चे भूख और कुपोषण से मारे गए हैं। कुल मिलाकर 127 लोगों की मौत भूख से जुड़ी बीमारियों से हो चुकी है। जैनब के पिता ने कहा कि उनकी बेटी को एक खास दूध (शिशु फॉर्मूला) की जरूरत थी, जो गाजा में नहीं मिल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची को गाय के दूध से एलर्जी थी और इसलिए उसे एक खास प्रकार के दूध की जरूरत थी। उस दूध की कमी से बच्ची को दस्त, उल्टी और संक्रमण हो गया। वह कुछ भी निगल नहीं पा रही थी और बहुत कमजोर हो गई थी।
6 हफ्ते तक ही जैनब को स्तनपान करा पाई मां
जैनब का परिवार एक तंबू में रहता था, क्योंकि वे भी युद्ध के कारण अपने घर से बेघर हो गए थे। उसकी मां एसरा भी भूख और कमजोरी से पीड़ित है। एसरा ने बताया कि वे जैनब को सिर्फ 6 हफ्ते तक ही स्तनपान करा पाईं, उसके बाद उसे फॉर्मूला दूध देना जरूरी हो गया था। मां ने कहा, 'मेरी बेटी के बाद और भी बच्चे मरेंगे। हम और हमारे बच्चे बस एक गिनती बनकर रह गए हैं। कोई हमारी परवाह नहीं करता।'
अब ज्यादा कुपोषित बच्चे पहुंच रहे अस्पताल
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अब बहुत ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार होकर अस्पताल आ रहे हैं। एक छोटे से विभाग में जहां सिर्फ 8 बिस्तर हैं, वहां 60 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। जमीन पर भी गद्दे बिछाकर इलाज किया जा रहा है। एक और क्लिनिक में हर हफ्ते लगभग 40 कुपोषित बच्चों को लाया जा रहा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस्राइल खाने और दवाइयों को गाजा में आने की अनुमति नहीं देगा, तब तक और ज्यादा मौतें होती रहेंगी। गाजा में डॉक्टर और राहतकर्मी इस्राइल द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं। खाने की कमी से गाजा में अकाल जैसे हालत बन गए हैं।
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गाजा को हर दिन 500-600 ट्रकों की जरूरत
मार्च में जब युद्धविराम खत्म हुआ, तब इस्राइल ने करीब ढाई महीने तक गाजा में खाना, दवाई और ईंधन की सप्लाई बंद कर दी थी, ताकि हमास पर दबाव डाला जा सके। बाद में मई में, अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद थोड़ी राहत दी गई। इस्राइल का कहना है कि उसने मई से अब तक 4,500 ट्रकों को गाजा में आने दिया है, जिनमें 2,500 टन शिशु आहार भी शामिल था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, गाजा को हर दिन 500 से 600 ट्रकों की जरूरत है, जबकि अब सिर्फ 69 ट्रक आ पा रहे हैं।