हुआओ द्वीप पर नमक के खेत 400 हेक्टेयर में फैले हैं। इनको आप अपनी सुविधा से नमक के तालाब भी कह सकते हैं। नमक के ये मैदान या समुद्री पानी के वाष्पीकरण के लिए बने उथले तालाब सिर्फ ऐतिहासिक अवशेष नहीं हैं। ये चीन और बाहर के कई देशों की नमक की मांग पूरी करते हैं।
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हुआओ द्वीप पर करीब 1,000 लोग रहते हैं। उनमें से सिर्फ 40 लोग ही नमक के खेतों में काम करते हैं।ये किसान खेतों में बने पूल में मोटर पंप के जरिये समुद्र का खारा पानी लाते हैं। सूरज की रोशनी पड़ने पर पानी भाप बनकर उड़ना शुरू हो जाता है।
इसके बाद किसानों की मेहनत शुरू होती है। वे तपती धूप में पानी को हिलोरते हैं और तलछट को निकालते रहते हैं ताकि खेतों में गंदगी न रहने पाए। पानी में नमक का गाढ़ापन बढ़ने पर वहां समुद्री नमक की परत बनने लगती है। किसान और नमक बनने का इंतज़ार करते हैं और फिर खेत में बचे हुए पानी को वापस समुद्र में बहा देते हैं।
वहां बचे हुए नमक को इकट्ठा किया जाता है। उसे छानकर साफ किया जाता है और फिर पानी के जहाजों से झेजियांग तट की ओर भेज दिया जाता है। चीन के बाहर लाखों लोग हुआओ द्वीप में तैयार किए गए नमक को चखते हैं।
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चीन फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री नमक उत्पादक देश है। यह सालाना करीब छह करोड़ 60 लाख टन नमक का निर्यात करता है।स्थानीय निवासियों में से ज्यादातर लोग यहां के बढ़ते पर्यटन उद्योग में लगे हैं। यह द्वीप हुआओ स्टोन फॉरेस्ट का केंद्र है, जिसे चीन के लोग शिलिन (पत्थरों का जंगल) कहते हैं।
इस द्वीप पर ज्वालामुखीय चट्टानों की संरचनाएं बिखरी हैं। द्वीप के तट भी उन्हीं चट्टानों से बने हैं जो लाखों साल से समंदर के थपेड़े खा रहे हैं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।