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नेपाल फिर होगा जलप्रलय का शिकार?: लगातार नदियों के रुकने से बढ़ी चिंता, प्रशासन भेज रहा है अलर्ट

Thu, 10 Sep 2026 10:37 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, काठमांडो

सार

नेपाल में पिछले दो सप्ताह में भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण कई नदियों और धाराओं का रास्ता रुकने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। जानें किन नदियों पर मंडरा रहा है खतरा...
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नेपाल त्रासदी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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नेपाल में रासुवा जिले में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से हुई तबाही के बीच एक और खतरा सामने आया है। पिछले दो सप्ताह में नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में भूस्खलन के कारण कई नदियों और धाराओं का रास्ता रुक गया है। इससे बाढ़ और अन्य आपदाओं का खतरा बढ़ने की चिंता पैदा हुई है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में रासुवा जिले में हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडी खोला का रास्ता रुक गया था। इसके बाद आई बाढ़ में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था। इसके बाद नेपाल में नदियों और धाराओं के रुकने की तीन अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। हालांकि, इनसे बड़े पैमाने पर बाढ़ नहीं आई, क्योंकि पानी के बहाव के साथ भूस्खलन का मलबा धीरे-धीरे हटता गया।

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कास्की में नदी का रास्ता रुका
ताजा घटना पश्चिमी नेपाल के कास्की जिले के दूरदराज के पहाड़ी इलाके अन्नपूर्णा ग्रामीण नगरपालिका में सामने आई। मंगलवार को भूस्खलन के कारण मोदी खोला नदी की सहायक नदी किमरुंग खोला का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया। इससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका पैदा हो गई। अधिकारियों ने नायापुल, बीरेठांती और आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अलर्ट किया। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने और जरूरी सावधानी बरतने को कहा गया।

बुधवार को राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने एक और सूचना जारी कर बताया कि किमरुंग खोला में पानी का बहाव सामान्य हो गया है और फिलहाल बाढ़ का कोई बड़ा खतरा नहीं है। प्राधिकरण ने कहा, हालांकि सामान्य स्तर का जोखिम बना हुआ है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने और मोदी खोला के किनारे काली गंडकी नदी के संगम तक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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कास्की के जिला प्रशासन कार्यालय के मुख्य जिला अधिकारी कुमांग सिंह गुरंग ने बताया कि अन्नपूर्णा साउथ के पास नदी का रास्ता रुकने की जानकारी चरवाहों से मिलने के बाद अलर्ट जारी किया गया था। उन्होंने कहा,  भूस्खलन के कारण किमरुंग खोला का ऊपरी हिस्सा रुक गया था। 

दाचुर्ला में चामेलिया नदी आंशिक रूप से रुकी
4 सितंबर को नेपाल-भारत सीमा का हिस्सा बनने वाली महाकाली नदी की सहायक चामेलिया नदी भी दाचुर्ला जिले के अपिहिमाल ग्रामीण नगरपालिका के भट्टर में लगातार भूस्खलन के कारण आंशिक रूप से रुक गई थी। 4 सितंबर की सुबह से दोपहर तक भूस्खलन होता रहा। इसके बाद दाचुर्ला जिला प्रशासन कार्यालय ने चामेलिया नदी के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट किया। स्थानीय स्तर पर इस नदी को चौलानी नदी के नाम से जाना जाता है।

प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि नदी का रास्ता पूरी तरह रुक सकता है, जिससे निचले इलाकों में गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और संबंधित सरकारी एजेंसियों से जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए जरूरी सावधानी बरतने को कहा गया। हालांकि, प्राकृतिक रूप से बना यह अवरोध धीरे-धीरे कम हो गया और रासुवा जिले में अगस्त के अंत में भोटेकोशी नदी की घटना जैसी बड़ी आपदा का खतरा टल गया।

गोरखा में भी नदी का रास्ता रुका था
31 अगस्त को गोरखा जिले की चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के छेकाम्पार क्षेत्र के चौरिखर्का में भूस्खलन के कारण बुधी गंडकी नदी की सहायक स्यार खोला का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया था। इस दौरान बुधी गंडकी नदी के खुद रुकने की अफवाहें भी सामने आईं। हालांकि, गोरखा के जिला प्रशासन कार्यालय के अधिकारियों ने बाद में इन खबरों को गलत बताया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि स्यार खोला आंशिक रूप से रुका था, लेकिन पानी के बहाव के साथ मलबा धीरे-धीरे हट गया और बाढ़ नहीं आई।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा जोखिम
अधिकारियों के अनुसार, महज दो सप्ताह में नदियों और धाराओं के रुकने की कई घटनाओं ने नेपाल की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति कमजोरी को उजागर किया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और हिमस्खलन के बढ़ते खतरे के पीछे जलवायु परिवर्तन भी एक प्रमुख कारण बनकर सामने आया है। बदलती जलवायु परिस्थितियां पहाड़ों की कमजोर भूगर्भीय संरचना और पर्यावरण को प्रभावित कर रही हैं।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के जलवायु परिवर्तन प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख और संयुक्त सचिव डॉ. महेश्वर ढकाल ने कहा, “हमारे पहाड़ ऊंचे, खड़े और कमजोर हैं, इसलिए हमारे लिए जोखिम का स्तर भी अपेक्षाकृत अधिक है। जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम हमारे हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष रूप से गंभीर हैं।”

ढकाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे के बीच नेपाल को आपदा से निपटने की बेहतर तैयारी और संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। उन्होंने सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बताई। उनके अनुसार, जलवायु से जुड़े आपदाओं के जोखिम से किसी एक मंत्रालय या सरकार के किसी एक स्तर के जरिए नहीं निपटा जा सकता।

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