लाहौर उच्च न्यायालय ने बीमार चल रहे पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की उस याचिका को मंगलवार को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे देशद्रोह के मामले में फैसले पर रोक लगाने की गुहार लगाई है। बता दें कि यहां की एक विशेष अदालत ने मुशर्रफ के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसी पर रोकने लगाने की मांग लेकर वह हाईकोर्ट पहुंचे थे।
डॉन न्यूज के हवाले से दी गई पीटीआई की खबर के अनुसार, लाहौर हाईकोर्ट के जस्टिस सैयद मजहर अली अकबर नकवी ने अपनी आपत्तियों को हटाने के बाद दुबई में रह रहे मुशर्रफ की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। हाईकोर्ट ने संघीय सरकार और आंतरिक मंत्रालय से 28 नवंबर तक इस मामले में जवाब तलब किया है।
बता दें कि मुशर्रफ ने अपने खिलाफ चल रहे देशद्रोह के मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट में भी आंतरिक मंत्रालय के जरिए अलग से एक याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में भी उन्होंने फैसला जारी करने से विशेष न्यायाधिकरण को रोकने के लिए गुहार लगाई थी।
इससे पहले बीते सोमवार को जस्टिस नकवी ने मुशर्रफ के वकील ख्वाजा अहमद को याचिका से जुड़ी दलीलें पेश करने के निर्देश दिए थे। उधर, जियो न्यूज के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि लाहौर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सवाल किया था कि क्या यह दलील उसके अधिकार क्षेत्र में आती है कि 76 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति इस्लामाबाद के निवासी हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है और इन परिस्थितियों में याचिकाकर्ता को शीर्ष अदालत में जाना चाहिए। विशेष अदालत ने 19 नवंबर को मुशर्रफ के खिलाफ 2007 में आपातकाल की स्थिति घोषित करने के राजद्रोह मामले में मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाए जाने के लिए 28 नवंबर की तारीख तय की थी।
दुबई में रह रहे मुशर्रफ ने शनिवार को हाईकोर्ट में विशेष अदालत के फैसले को चुनौती दी और अपनी अनुपस्थिति को वजह बताते हुए मुकदमे को स्थगित करने की मांग की। बता दें कि अगर कोर्ट में मुशर्रफ को दोषी करार दिया जाता है तो उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है।