लाडोजा ने कहा कि अमेरिका के अलावा, एलएफजेड से दुनिया के अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों तक भी पहुंच आसान हो जाएगी। उन्होंने कहा कि नाइजीरिया में बने सामान यूरोपीय संघ के देशों में जीएसपी से फायदे में रहते हैं और उन्हें कम शुल्क या शून्य शुल्क देना पड़ता है।
अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिससे भारत का करीब 49 अरब डॉलर का व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। अब नाइजीरिया ने भारत के उद्योगों के सामने एक पेशकश की है। नाइजीरिया ने उसके लागोस मुक्त क्षेत्र (एलएफजेड) में निर्माण करने की पेशकश की है। लागोस मुक्त क्षेत्र से अमेरिका और दुनिया के अन्य प्रमुख बाजारों तक आसान पहुंच मिलती है। एलएफजेड की प्रबंध निदेशक और सीईओ अदेसुवा लाडोजा ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय कंपनियों खासकर, कपड़ा, चमड़ा और ऑटोमोबाइल के लिए कड़ी चुनौती पेश की है।
विज्ञापन
अमेरिका और दुनिया के बाजारों में मिलेगी आसान पहुंच
लाडोजा ने कहा कि 'लागोस मुक्त क्षेत्र की खासियत यह है कि अमेरिका को नाइजीरियाई निर्यात पर 14 प्रतिशत तक का न्यूनतम शुल्क लगता है, जो कई अन्य देशों पर लागू शुल्कों से काफी कम है। ऐसे में भारतीय कंपनियां एलएफजेड में अपनी उत्पादन इकाइयां स्थापित कर कम टैरिफ में अमेरिका सामान भेज सकती हैं। लाडोजा ने कहा कि अमेरिका के अलावा, एलएफजेड से दुनिया के अन्य प्रमुख वैश्विक बाजारों तक भी पहुंच आसान हो जाएगी। उन्होंने कहा कि नाइजीरिया में बने सामान यूरोपीय संघ के देशों में जीएसपी से फायदे में रहते हैं और उन्हें कम शुल्क या शून्य शुल्क देना पड़ता है।
अफ्रीकी महाद्वीप के बाजारों में भी मिलेगा प्रवेश
लाडोजा ने यह भी बताया कि एलएफजेड में उत्पादन से अफ्रीकी महाद्वीप के 1.4 अरब की आबादी वाले बाजार में भी पहुंच मिलेगी। उन्होंने कहा कि 'एलएफजेड केवल लागत-बचत वाला विकल्प ही नहीं है, बल्कि यह एक व्यापार रणनीति भी है, जो भारतीय कंपनियों का जोखिम कम करती है। गौरतलब है कि टाटा इंटरनेशनल ने लागोस मुक्त क्षेत्र में एक असेंबली प्लांट स्थापित किया है। इस सुविधा से टाटा, नाइजीरियाई बाजार के लिए वाणिज्यिक वाहनों की असेंबली करता है।