भारत-पाकिस्तान के विवादों के बीच 17 जुलाई का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। नीदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में फैसला सुनाया जिसमें पाकिस्तान को झटका लगा है और भारत की बड़ी जीत हुई है।
स्लोवाकिया के जज पीटक टॉमका कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई कर रहे पैनल में सबसे वरिष्ठ हैं। टॉमका संयुक्त राष्ट्र में स्लोवाकिया के राजदूत भी रह चुके हैं। वह साल 2003 में आईसीजे से जुड़े हुए हैं। टॉमका साल 2012 से 2015 तक आईसीजे के अध्यक्ष थे। वह आईसीजे के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों को देखने का उन्हें खासा लंबा अनुभव है।
सोमालिया के अब्दुलकवी अहमद यूसुफ फरवरी 2018 में आईसीजे के अध्यक्ष चुने गए थे। यूसुफ 2009 से आईसीजे के सदस्य हैं। इससे पहले वे युनेस्को में कानूनी सलाहकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं। जानकारी के मुताहिक कुलभूषण जाधव मामले में अब्दुलकवी अहमद यूसुफ ही फैसला पढ़कर सुनाएंगे।
चीन की शू हांकिन जून 2010 से आईसीजे की सदस्य हैं। साल 2012 में उन्हें दोबारा चुना गया था। उन्हें 6 फरवरी 2018 में आईसीजे की उपाध्यक्ष चुना गया। हांकिन चीन के कानूनी विधि विभाग की प्रमुख और नीदरलैंड में चीन की राजदूत थीं।
कुलभूषण जाधव का केस जब अंतरराष्ट्रीय अदालत पहुंचा तब फ्रांस के जज रॉनी अब्राहम आईसीजे के अध्यक्ष थे। जज रॉनी फ्रांस के विदेश मंत्रालय में कानूनी सलाहकार हैं। अब्राहम इस कोर्ट से साल 2005 से जुड़े हुए हैं। वे साल 2015 से 2018 तक आईसीजे के अध्यक्ष थे। उन्हें 6 फरवरी 2018 में एक बार फिर चुना गया।
जस्टिस दलवीर भंडारी अंतरराष्ट्रीय अदालत में इकलौते भारतीय जज हैं, जो कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई में शामिल हैं। जस्टिस भंडारी 2012 से आईसीजे के सदस्य हैं। भंडारी फरवरी 2018 में दोबारा आईसीजे के सदस्य चुने गए। भंडारी भारत के सर्वोच्च न्यायालय में जज रह चुके हैं।
ब्राजील के एंटोनियो ऑगस्टो ट्रिनडाडे साल 2009 से आईसीजे के सदस्य हैं। उन्हें फरवरी 2018 में दोबारा चुना गया। साल 2017 में जज ट्रिनेड ने जज दलवीर भंडारी के फैसले के साथ सहमति जताई थी। कुलभूषण जाधव मामले में यह सकारात्मक खबर है।
ऑस्ट्रेलिया के जज जेम्ल रिचर्ड क्रॉफोर्ड भारत के खिलाफ 2 बार पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने एक बार भारत बनाम पाकिस्तान किशनगंगा डैम विवाद में क्रॉफोर्ड पाकिस्तान की तरफ से और दूसरी बार मैरिटाइम बाउंड्री विवाद में बांग्लादेश की तरफ से भारत के खिलाफ पैरवी की। हालांकि कुलभूषण जाधव केस में वह जज की भूमिका में हैं। क्रॉफोर्ड 2015 से अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के सदस्य हैं।
मोरक्को के जज मोहम्मद बेनौना साल 2006 से आईसीजे के सदस्य हैं। बेनौना साल 2001 से लेकर 2006 तक संयुक्त राष्ट्र में मोरक्को के स्थाई प्रतिनिधि थे। बेनौना को साल 2015 में एक बार फिर चुना गया।
अमेरिका की जज जोआन ई डोनोह्यू साल 2010 से आईसीजे की सदस्य हैं। वह 2015 में एक बार फिर चुनी गईं थीं। जज डोनोह्यू अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट का हिस्सा भी रही हैं। डोनाह्यू अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को अंतरराष्ट्रीय कानून पर सलाह देती थीं।
इटली के जज जॉर्जिओ गजा फरवरी 2012 से आईसीजे के सदस्य हैं। गजा इटली सरकार की तरफ से आईसीजे में अधिवक्ता के तौर पर भी जा चुके हैं। गजा अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं।
जमैका के जज पैट्रिक लिप्टन रॉबिंसन फरवरी 2015 से आईसीजे के सदस्य हैं। रॉबिंसन 26 सालों तक संयुक्त राष्ट्र के छठे कानूनी समिति के सदस्य रहे हैं। इसके अलावा भी वह कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सदस्य रह चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनका अनुभव खासा पुराना है।
युगांडा की जज जूलिया सेबुटिंडे वहां हाई कोर्ट की जज रह चुकीं हैं। वह साल 2012 से आईसीजे की सदस्य हैं। जूलिया कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सदस्य भी रह चुकी हैं।
रूस फेडरेशन की जज किरिल आईसीजे के साल 2015 से सदस्य हैं। किरिल रूस की तरफ से आईसीजे में कई बार एजेंट के तौर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
पाकिस्तान ने जज तस्सदुक को जाधव केस में एक एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्त किया है। दरअसल नियमों के अनुसार ऐसा एक देश तभी करता है, जब उसका कोई भी जज सुनवाई कर रही पीठ में नहीं होता है। जिलानी पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर एक साल काम कर चुके हैं।
लेबनान के जज सलाम अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के सबसे नए सदस्य हैं। साल 2007 से 2017 तक वह संयुक्त राष्ट्र में लेबनान के राजदूत और स्थायी सदस्य रह चुके हैं। उन्हें 6 जनवरी 2018 को आईसीजे के जज के तौर पर चुना गया था।
जाधव मामले कि सुनवाई कर रही पीठ में सबसे नए जजों में से एक जापान के जज यूजी इवसावा मानवाधिकारों के दुनिया में सबसे बड़े महारथियों में से एक हैं।
आईसीजे को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर द्वारा जून 1945 में स्थापित किया गया था और इसने अप्रैल 1946 में काम करना शुरू किया था। यह संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का प्रमुख न्यायिक हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में शांति पैलेस में है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश हैं, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा नौ साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं और इनको दोबारा भी चुना जा सकता है। हर तीसरे साल इन 15 न्यायाधीशों में से पांच दोबारा चुने जा सकते है। न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में अहम शर्त यह होती है कि दो न्यायधीश एक देश से नहीं चुने जा सकते हैं।