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थाईलैंड के राजा ने आंदोलनकारियों से की ‘मेलमिलाप’ की बात, चार दशकों के बाद पहली बार आए सामने

Mon, 02 Nov 2020 04:25 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक

सार

  • कई महीनों से चल रहा है थाईलैंड में राजतंत्र के खिलाफ आंदोलन
  • राजतंत्र समर्थकों ने भी किया रविवार को बैंकॉक में विशाल प्रदर्शन
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Thailand King Maha Vajiralongkorn - फोटो : CGTN
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विस्तार
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थाईलैंड में राजतंत्र की भूमिका पर बढ़ते सामाजिक टकराव के बीच राजा महा वजीरालोंगकर्ण ने मेलमिलाप की पेशकश की है। देश में पिछले कई महीनों से राजतंत्र में सुधार की मांग को लेकर जन आंदोलन चल रहा है। खासकर इसमें छात्रों और युवकों की सक्रिय भूमिका रही है। इसके जवाब में रविवार को राजतंत्र समर्थकों ने राजधानी बैंकाक में एक बड़ा प्रदर्शन किया। उसमें हजारों लोग शामिल हुए। उसके बाद वजीरालोंगकर्ण महारानी के साथ सार्वजनिक रूप से उपस्थित हुए और वहां आयोजित एक समारोह में मीडिया को संबोधित किया। थाईलैंड में 1932 में संवैधानिक राजतंत्र कायम होने के बाद यह दुर्लभ मौका था, जब राजा ने सार्वजनिक रूप से अपना बयान दिया।

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इसमें महाराज वजीरालोंगकर्ण ने अपने विरोधी आंदोलनकारियों पर कोई टिप्पणी नहीं की। बल्कि कहा- ‘हम सबको समान रूप से प्यार करते हैं।’ जब पत्रकारों ने उनका ध्यान इस तरफ दिलाया कि आंदोलनकारी उनकी शक्तियां घटाने की मांग कर रहे हैं, तो राजा ने कहा- “थाईलैंड मेलमिलाप की भूमि है।” जिन चुने हुए मीडिया संस्थानों को समारोह में आमंत्रित किया गया था, उनमें अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन भी है। सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में ध्यान दिलाया है कि 68 वर्षीय महाराज वजीरालोंगकर्ण इसके पहले आखिरी बार मीडिया के सामने 1979 में आए थे, जब वे युवराज थे।

पिछले जुलाई से तेज हुए राजतंत्र विरोधी आंदोलन के नेताओं का आरोप है कि राजा को असीमित शक्तियां मिली हुई हैं। उनकी मांग है कि राजा को संविधान के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। हालांकि देश में राजतंत्र के पक्ष में मौजूद जन भावना को देखते हुए अब छात्र नेताओं ने राजतंत्र खत्म करने की मांग पर जोर देना छोड़ दिया है।
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हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक पिछले हफ्ते कराए गए एक जनमत सर्वेक्षण से ये सामने आया कि 62 फीसदी लोग प्रधानमंत्री प्रयुथ चान-ओचा से नाराज से हैं। उनकी राय है कि बहुत से लोगों की यही नाराजगी राजतंत्र विरोधी भावना में बदल गई है। इससे समाज में राजतंत्र के खिलाफ ना बोलने की अब तक मौजूद रही वर्जना टूट गई है। वैसे अभी भी थाईलैंड में राजतंत्र को बदनाम करने की कोशिश गैर कानूनी है। ये आरोप साबित होने पर 15 साल तक की कैद हो सकती है।
 
थाईलैंड पिछले कुछ समय से गहरे आर्थिक संकट में है। ये संकट कोरोना महामारी के कारण और गहरा गया है। इससे सरकार विरोधी भावनाएं तेजी से उभरी हैं। इसी क्रम में राजा वजीरालोंगकर्ण की भूमिका भी आलोचनाओं के दायरे में आई है। आरोप है कि किंग्स गार्ड नामक सैनिक इकाई की नियुक्ति कर राजा ने सत्ता पर अपनी पकड़ हाल में और मजबूत कर ली है। उन्होंने अपने धन का बड़ा हिस्सा जर्मनी ट्रांसफर कर दिया है, जहां ज्यादातर वे रहते हैं। इसीलिए पिछले सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारियों ने बैंकाक स्थित जर्मन दूतावास पर प्रदर्शन कर जर्मनी में राजा की गतिविधियों और उनके टैक्स रिकॉर्ड्स की जांच की मांग की थी।
 
उसके बाद से राजतंत्र समर्थकों की गोलबंदी शुरू हुई है। विश्लेषकों ने शक जताया है कि इसके पीछे सरकार और राजभवन की भूमिका हो सकती है। ये मुमकिन है कि ऐसी कोशिशों से एक बड़ी भीड़ जुटाकर राजा और सरकार ने अपनी ताकत दिखाई। उसके बाद राजा वजीरालोंगकर्ण ने मेलमिलाप की बात कर अपने विरोधी प्रदर्शनकारियों को ये संदेश दिया कि उनके पास भी जन समर्थन है। इसीलिए ये सवाल उठा है कि राजा ने जो बातें कही हैं, वे सचमुच दिल से कही गई हैं या वो कोई सियासी चाल का हिस्सा हैं।

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