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'पाकिस्तान पीओके खाली करो': कश्मीरी पंडित प्रवासियों का अमेरिका में पाक दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन

Sat, 24 Oct 2020 02:37 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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Global Kashmiri Pandit Diaspora protest in Washington DC America - फोटो : Twitter
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पाकिस्तान और कश्मीरियों पर उसके अत्याचारों के खिलाफ असंतोष की आवाज दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में दहला देनेवाले मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर ध्यान दे रहा है।

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इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा (जीकेपीडी) (वैश्विक कश्मीरी पंडित प्रवासी) और कई अन्य संगठनों ने गुरुवार को अमेरिका में पाकिस्तान दूतावास के बाहर एक कार विरोध रैली आयोजित की, जिसमें 1947 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कश्मीर पर पाकिस्तान के कब्जे को याद दिलाया गया।



प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए पाकिस्तान से कश्मीर की अवैध कब्जे वाली जमीन को खाली करने को कहा।

एक पोस्टर में लिखा था, "पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर को खाली करो। कश्मीर भारत का एक एकीकृत हिस्सा है।" 

एक अन्य पोस्टर में लिखा था, "कश्मीर में 1947 का जिहादी हमला रातोंरात नहीं हुआ, इसे पाकिस्तान ने योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया था।" 
 

वाशिंगटन डीसी के लिए रैली के आयोजक और जीकेपीडी समन्वयक डॉ. मोहन सप्रू ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद की पाकिस्तान की नीति के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया।
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समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने कहा, ''मास्क पहनकर और सोशल डिस्टेंसिंग की मौजूदा प्रथा के साथ, रैली में प्रदर्शनकारी सीमा पार आतंकवाद और कश्मीर में दखल की  पाकिस्तान की 73 साल पुरानी नीति की कड़ी निंदा करने के लिए जमा हुए हैं। पाकिस्तान ने कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और बौद्ध जैसे अल्पसंख्यक समुदायों को खास तौर से निशाना बनाया है। 

सप्रू ने कहा कि 22 अक्तूबर 1947 को शांतिपूर्ण कश्मीरियों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षित और प्रायोजित आतंकवादी कबायिलियों द्वारा सीमा पार की आक्रामकता ने भयावह कश्मीर समस्या की शुरुआत की।

उन्होंने जोर देकर कहा, "सीमा पार इस्लामिक आतंकवाद की क्रूरता बेरोकटोक जारी रही है और इसके परिणामस्वरूप 1989-1991 के भयावह कालखंड के दौरान नरसंहार और मूल कश्मीरी हिंदुओं को पलायन के लिए मजबूर किया गया। कश्मीर हो, या अमेरिका या दुनिया के किसी भी हिस्से में जघन्य आतंकवादी घटनाएं होती हैं, आखिरकार, आतंकवाद मानवता की अंतरात्मा पर एक धब्बा है और सभ्य दुनिया में विवादों को निपटाने का एक वैध साधन नहीं हो सकता है।" 

सप्रू ने कहा, इसके अलावा, घाटी में अभी भी रहने वाले कुछ सौ कश्मीरी हिंदू परिवारों की कठिनाइयां और पीड़ा, बड़े पैमाने पर जारी हैं। 

इतिहास का काला दिन है 22 अक्तूबर
यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) ने हाल ही में 22 अक्तूबर को जम्मू-कश्मीर के इतिहास में सबसे काला दिन कहा है। इसी दिन पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े इलाके को अपने कब्जे में करने के लिए ऑपरेशन गुलमर्ग लांच किया था। एक यूरोपीय थिंक टैंक के अनुसार, इस दौरान हुए कबायइली हमले में 35,000 से 40,000 कश्मीरियों की मौत हुई थी।

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