पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिका में कश्मीरी हिंदुओं ने आतंकी घटनाओं के प्रति जवाबदेही को लेकर आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि कश्मीर में बढ़ रहे आतंकवाद को रोकने के लिए वैश्विक शक्तियां सख्त कदम उठाएं। प्रवासी सदस्यों ने कहा कि 22 अप्रैल को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भारत यात्रा के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा तैयारी में खामियों और कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए खतरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इंडो-अमेरिकन कश्मीर फोरम (आईएकेएफ) के अंतरराष्ट्रीय समन्वयक डॉ. विजय सजावल ने दावा किया कि यह हमला एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी थी। हजारों पर्यटक रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी हमले के दिन कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं दिखी। एक हाई-प्रोफाइल राजनयिक यात्रा के बावजूद जोखिम के आकलन को नजरअंदाज कर दिया गया।
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उन्होंने कहा कि जबकि हमारा ध्यान अक्सर सीमा पार आतंकवाद पर केंद्रित रहता है। लेकिन भारत में आतंकवाद को आंतरिक समर्थन भी मिल रहा है। कई भूमिगत कार्यकर्ता हैं, जो चुपचाप आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देते हैं। उन्होंने दावा किया कि न्यायिक देरी और प्रशासनिक अक्षमताओं के कारण भी ऐसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती।
पद्मश्री से सम्मानित और ओक्लाहोमा में रहने वाले शिक्षाविद् डॉ. सुभाष काक ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद साफ है कि पाकिस्तान के साथ केवल राजनयिक संबंध तोड़ना या व्यापार पर रोक लगाना ही पर्याप्त नहीं है। ह्यूस्टन में रहने वाले कश्मीरी पंडित अमित रैना ने कहा कि कई लोगों के लिए यह एक चौंकाने वाली घटना थी। मगर हमारे लिए यह एक बार-बार आने वाला बुरा सपना है। अमरनाथ, वंधामा, नादिमर्ग जैसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं। लेकिन हम अभी भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
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पांच मई को होगी बैठक
पहलगाम हमले के बाद ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा (जीकेपीडी) और हिंदूएक्शन ने पांच मई को वाशिंगटन डीसी में पाकिस्तान का हिंदुओं के खिलाफ छद्म युद्ध: वैश्विक प्रभाव विषय पर बैठक बुलाई है। हिंदूएक्शन के कार्यकारी निदेशक उत्सव चक्रवर्ती ने कहा कि यह हमला एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खतरे को दर्शाता है। यह सिर्फ एक और आतंकी घटना नहीं है। यह एक सतत वैचारिक अभियान का हिस्सा है। अमेरिका और उसके सहयोगियों को पाकिस्तान द्वारा जिहादी समूहों को भू-राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने को गंभीरता से लेना चाहिए।
लगातार हो रही पहलगाम हमले की निंदा
पहलगाम हमले की वैश्विक नेताओं ने व्यापक निंदा की है। साथ ही लोग भारत के साथ एकजुटता व्यक्त कर रहे हैं। साथ ही आतंकवाद की निंदा की गई। पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के 50 से अधिक शहरों में हमले की निंदा करते हुए स्मारक सभाएं और सामुदायिक प्रार्थना सभाएं हुईं हैं।