माओ निंग ने कहा, यह भारत और पाकिस्तान के बीच के इतिहास से बचा हुआ मुद्दा है और इसे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौते के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए।
प्रवक्ता ने आगे कहा, दोनों पक्षों को एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए, जो स्थिति को और जटिल बना सकती है। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों को विवाद को सुलझाने और क्षेत्र में शांति-स्थिरता बनाए रखने के लिए बातचीत और संवाद में शामिल होना चाहिए।
भारत ने पहले कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को यह कहते हुए खारिज किया था कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामले पूरी तरह से उसके आंतरिक मामले हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस साल मार्च में कहा था, चीन समेत अन्य देशों के पास टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें ध्यान देना चाहिए कि भारत अपने आंतरिक मुद्दों के सार्वजनिक निर्णय से परहेज करता है।
भारत-पाकिस्तान व्यापार
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कश्मीर मुद्दे और सीमापार आतंकवाद को लेकर भारत और पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। भारत ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद - 370 को निरस्त कर दिया था। जिसके बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध खत्म हो गए।
पाकिस्तान में भारत के तत्कालीन राजदूत अजय बिसारिया
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अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने नई दिल्ली के साथ राजनीयिक संबंधों को डाउनग्रेड कर दिया और भारतीय दूत को निष्कासित कर दिया। तबसे पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापार संबंधों की बर्फ काफी हद तक जमी हुई है।
भारत ने पाकिस्तान से बार-बार कहा है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग था, है और आगे भी रहेगा। भारत ने कहा कि वह आतंक, शत्रुता और हिंसा से मुक्त वातावरण में पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है।