करतारपुर कॉरिडोर उदघाटन के दौरान यात्रा करने वाले भारतीयों के पासपोर्ट को लेकर पाकिस्तान ऊहापोह की स्थिति में नजर आ रहा है। ऐसा लगा रहा है जैसे उसकी एजेंसियों के बीच ही समन्वय की कमी है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय कार्यालय की तरफ से अब कहा गया है कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरुद्वारा दरबार साहिब आने वाले भारतीय सिख श्रद्धालुओं को एक साल तक के लिए पासपोर्ट की शर्त से मुक्त रखा है।
ये बयान पाकिस्तानी सेना के उस बयान के एकदम उलट है जिसमें उसने कहा था कि यहां आने वाले भारतीयों को पासपोर्ट के साथ ही आना होगा। नियमित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मो. फैसल ने कहा कि गुरुनानक के 550वें प्रकाशोत्सव पर भारतीय श्रद्धालुओं को एक साल तक पासपोर्ट के बिना भी पाकिस्तान आने की अनुमति होगी।
पाक सेना ने पलटा था फैसला
करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तानी सेना ने अपने ही प्रधानमंत्री इमरान खान के फैसले को पलट दिया। पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर के अनुसार अब सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर कॉरिडोर का प्रयोग करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की आवश्यकता होगी। इससे कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री इमरान खान ने घोषणा की थी कि भारतीय श्रद्धालुओं को पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब आने के लिए महज एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर की इस टिप्पणी से एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा था कि करतारपुर स्थित गलियारा जाने के लिए सिख श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत होगी या नहीं। डॉन न्यूज ने ‘हम’ समाचार चैनल के हवाले से बताया कि मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को कहा कि भारतीय सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर गलियारे का प्रयोग करने के लिए पासपोर्ट दिखाना जरूरी होगा।
गफूर ने कहा कि सुरक्षा कारणों से, प्रवेश पासपोर्ट आधारित पहचान पर मिली अनुमति के तहत कानूनी तरीके से दिया जाएगा। बुधवार को भारत ने पाकिस्तान से यह साफ करने को कहा था कि करतारपुर साहिब जाने के लिए पासपोर्ट की जरूरत होगी या नहीं।
एक नवंबर को, प्रधानमंत्री खान ने करतापुर गलियारे का निर्माण पूरा होने की ट्विटर पर घोषणा करते हुए कहा था कि उन्होंने दो शर्तों को माफ कर दिया है। इनमें से एक पासपोर्ट से जुड़ी शर्त थी जबकि दूसरी शर्त भारत से करतारपुर तीर्थयात्रा पर आने वाले सिखों द्वारा 10 दिन पहले पंजीकरण कराने से जुड़ी थी।
उन्होंने कहा था कि भारत के सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर आने के लिए पासपोर्ट की नहीं बल्कि एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। इसके अलावा उद्घाटन समारोह के लिए आने वाले और 12 नवंबर को सिख गुरु की 550वीं जयंती के मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं से 20 डॉलर का सेवा शुल्क भी नहीं वसूला जाएगा।
करतारपुर कॉरिडोर भारत के पंजाब स्थित डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में स्थित करतारपुर के दरबार साहिब से जोड़ेगा। यह गुरुद्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
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