1953 में सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग शेरपा के पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद पर्वतारोहण एक आकर्षण का केंद्र बन गया है। दुनिया की इस सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर कई लोग चढ़ाई कर चुके हैं लेकिन नेपाल के 49 वर्षीय पर्वतारोही कामी रीता शेरपा अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचने की राह पर हैं। उन्होंने अब तक 23वीं बार इस शीर्ष चोटी को फतह कर डाला है।
इससे पहले मौजूदा रिकॉर्ड लगातार 22 बार माउंट एवरेस्ट पर विजय पताका फहराने का है और यह भी कामी रीता शेरपा के ही नाम है। यानी उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को इस बार तोड़ डाला है। वे दुनिया के सबसे अनुभवी पर्वतारोही बन चुके हैं। कामी रीता शेरपा समेत आठ नेपाली पर्वतारोही मंगलवार को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचे। इसके साथ ही आने वाले हफ्तों में दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर पर चढ़ने के संभावित रिकॉर्ड संख्या में पर्वतारोहियों के लिए रास्ता खुल गया है।
नेपाल ने इस साल पर्वतारोहियों के लिए 11,000 डॉलर (करीब 7.72 लाख रुपये) की लागत के रिकॉर्ड 378 परमिट जारी किए हैं। अगर मौसम के खराब होने से पर्वतारोहण के दिनों में कमी आती है, तो भीड़ बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। रिकॉर्ड बना चुके कामी शेरपा 25 बार एवरेस्ट को फतह कर इतिहास बनाना चाहते हैं।
1994 में पहली बार फतह किया एवरेस्ट
बताते चलें कि साल 1994 में कामी रीता शेरपा पहली बार माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे थे। इसके बाद से यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस चोटी पर चढ़ाई करने का सही समय मार्च से मई तक होता है। कामी ने नेपाल की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना शुरू किया था। इस चोटी पर पहुंचने का दूसरा रास्ता तिब्बत की तरफ से है।
पिछले साल पांच पर्वतारोही मारे गए
पिछले साल माउंट एवरेस्ट के शिखर पर रिकॉर्ड 807 पर्वतारोही पहुंचे थे, जिसमें से 563 लोग दक्षिण से और 244 तिब्बत की तरफ से चोटी पर चढ़े थे। हालांकि, पिछले साल इस कोशिश में एक अनुभवी शेरपा गाइड सहित पांच पर्वतारोहियों की मौत भी हो गई थी।
शेरपाओं की मदद जरूरी
विदेशी पर्वतारोही चोटी पर चढ़ाई करने के लिए अनुभवी शेरपाओं की मदद लेते हैं। ये अनुभवी शेरपा पर्वतारोही दल के लिए ट्रैवल रूट तैयार करते हैं, रस्सियां जगह पर लगाते हैं और जरूरी औजार और सामान साथ लेकर चलते हैं।
क्या है कामी रीता शेरपा की प्रेरणा
शेरपा की इस कामयाबी का एक मतलब ये भी है कि वह दुनिया के सबसे अनुभवी एवरेस्ट पर्वतारोही बन जाएंगे। वह कहते आए हैं कि वह इतिहास बनाने की कोशिश इसलिए करते हैं ताकि उनके देश और समुदाय को इसपर गर्व हो।