अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अफसर जॉन किरियाकू ने एक बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अमेरिका ने अगले हफ्ते की शुरुआत में ईरान पर सैन्य हमला करने का पक्का फैसला कर लिया है। जूलियन डोरे पॉडकास्ट पर बात करते हुए किरियाकोउ ने बताया कि व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन की तरफ से दी गई समय सीमा के बावजूद हमला बहुत जल्द होने वाला है। किरियाकोउ ने कहा, 'मेरा एक दोस्त है जो सीआईए का पूर्व अफसर है। उसने आज सुबह व्हाइट हाउस में अपने दोस्तों से बात की। उसका कहना है कि सोमवार या मंगलवार को ईरान पर हमला करने का फैसला हो चुका है।'
दस दिन का समय सिर्फ एक चाल?
किरियाकोउ ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल ईरान को एक प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए दस दिन का समय दिया था। इसमें ईरान को अपना बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और यूरेनियम संवर्धन बंद करने के साथ-साथ हमास, हिजबुल्लाह और हूथी जैसे समूहों की मदद रोकने को कहा गया था। लेकिन किरियाकोउ का मानना है कि यह समय सीमा केवल ध्यान भटकाने की एक चाल है। उन्होंने कहा, "वे आपको दस दिन देंगे, लेकिन दो दिन बाद ही हमला कर देंगे। उन्हें लगता है कि इससे दुश्मन का संतुलन बिगड़ जाता है।"
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सैनिकों की सुरक्षा के लिए जगह बदली
हमले की तैयारी के संकेतों के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने सैनिकों को सुरक्षित जगहों पर भेजना शुरू कर दिया है। 'द जेरूसलम पोस्ट' और 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के अल उदीद बेस से सैकड़ों सैनिकों को दूसरी जगह भेजा गया है। बहरीन, इराक, सीरिया, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और यूएई में भी अमेरिकी ठिकानों पर ऐसे ही बदलाव देखे गए हैं।
अधिकारियों को डर है कि युद्ध होने पर वहां मौजूद 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक ईरान का मुख्य निशाना बन सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी मिशन ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमले की स्थिति में इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी बेस और संपत्तियां उनका निशाना होंगी। इसे देखते हुए अमेरिका अपने एयर डिफेंस सिस्टम को शिफ्ट कर रहा है और एयरक्राफ्ट कैरियर को ईरान की पहुंच से दूर रख रहा है।
ट्रंप की टीम में युद्ध को लेकर बंटवारा
पूर्व सीआईए अफसर ने बताया कि ट्रंप प्रशासन के अंदर इस हमले को लेकर दो गुट बन गए हैं। उन्होंने कहा, युद्ध विरोधी गुट में जेडी वेंस और तुलसी गबार्ड हैं, जबकि युद्ध समर्थक गुट का नेतृत्व मार्को रुबियो कर रहे हैं। इसमें पीट हेगसेथ और अब ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ भी शामिल हैं। किरियाकोउ ने बताया कि ट्रंप ने पिछले 12 महीनों में सभी ज्वाइंट चीफ्स को बदल दिया है और ऐसे लोगों को रखा है जो उनके प्रति वफादार हैं। इसी वजह से सेना का रुख अब बदल गया है।
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यूएफओ फाइलों से ध्यान भटकाने की कोशिश?
चर्चा के दौरान यह भी बात उठी कि सरकार जल्द ही यूएफओ से जुड़ी फाइलें जारी कर सकती है। किरियाकोउ ने माना कि हमले के समय ही इन फाइलों को जारी करने की बात करना जनता का ध्यान भटकाने का एक तरीका हो सकता है। जानकारों का मानना है कि तेहरान के मौजूदा प्रस्ताव अमेरिका को रोकने के लिए काफी नहीं हैं और राष्ट्रपति ट्रंप अब ईरान में सत्ता परिवर्तन के विचार पर काम कर रहे हैं।
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