वैसे राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव काफी बढ़ गया। ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला पर कई सख्त प्रतिबंध लगा दिए। जनवरी 2019 में वेनेजुएला में जब दक्षिणपंथी नेता हुआन गुआइदो ने तख्ता पलट की कोशिश की तो ट्रंप प्रशासन ने उसका समर्थन किया। इसके बाद वेनेजुएला ने अमेरिका से अपने सारे संबंध तोड़ लिए। अब आशा की जा रही है कि बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों में रिश्तों को सुधारने की नई पहल होगी। बाइडेन टीम के हवाले से छपी खबर ने ताजा उम्मीद को और बढ़ा दिया है।
इस बीच ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाने की अपनी पुरानी नीति पर लगातार चल रहा है। उसने अब एक ताजा कदम उठाते हुए उस टेक्नोलॉजी फर्म पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसने हाल में वेनेजुएला में हुए संसदीय चुनाव में वोटिंग मशीनें उपलब्ध कराई थीं। ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया है कि इस कंपनी ने मतदान में धांधली करने की मादुरो सरकार की कोशिशों में मदद की। वेनेजुएला ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। ये कंपनी मूल रूप से अर्जेंटीना की है। वेनेजुएला में उसकी शाखा मौजूद है।
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने आरोप लगाया है कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मुहैया कराने वाली इस कंपनी को मादुरो सरकार से लाखों डॉलर का ठेका मिला। इसलिए यह चुनाव में धांधली की उसकी कोशिशों में सहभागी बनी। अमेरिका ने कंपनी के दो बड़े अधिकारियों पर व्यक्तिगत प्रतिबंध लगा दिए हैँ।
लेकिन आलोचकों ने कहा है कि अमरिका समर्थित नेता गुआइदो खुद ही इस चुनाव में शामिल नहीं हुए। मतदान को अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष बताया। ऐसे में अमेरिका का यह कहना बेबुनियाद है कि चुनाव में धांधली की गई। इस घोषणा के बाद मादुरो ने बेहद तीखे शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा- सत्ता से बाहर जा रहे मूर्ख (पोम्पियो) का यह मूर्खतापूर्ण कदम है। ट्रंप प्रशासन का ताजा कदम और ये प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच मौजूद कड़वाहट को जाहिर करते हैं। अब आशा की जा रही है कि बाइडन के कार्यकाल में ये हालत बदलेगी। बाइडन की बातचीत की नीति अगर यहां आगे बढ़ी, तो दुनिया के दूसरे विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का रास्ता भी उससे खुलेगा।