चीन मे योजना निर्माण से जुड़ी सर्वोच्च एजेंसी- नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद कारखानों में बढ़ी गतिविधियों और ठंड में हीटिंग की बढ़ी मांगों के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। इसलिए बिजली कई राज्यों में बिजली की कटौती करनी पड़ी है। हुनान और जियांग्शी जैसे प्रांत पहले ही बिजली की कमी की समस्या झेलते रहे हैं। एजेंसी ने कहा कि ये दोनों प्रांत देश के कोयला भंडार से दूर हैं। उन्हें कहा गया है कि वे बाहरी स्रोतों पर ज्यादा निर्भर नहीं रह सकते। एजेंसी ने लोगों को आश्वासन दिया है कि सर्दियां खत्म होते-होते बिजली की सप्लाई सामान्य हो जाएगी।
कोयल की कीमत में भारी उछाल
बिजली की बढ़ी मांग के कारण कोयले की कीमत में तेजी से उछाल आया है। थर्मल पॉवर हाउसों में इस्तेमाल होने वाले कोयले का भाव सरकार द्वारा तय कीमत 600 युवान प्रति टन से बढ़ कर 730 टन हो गया है। इसके अलावा हाल में कई कोयला खदानों में हादसे हुए। इनका असर भी कोयले की सप्लाई पर पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया से चीन के बढ़े तनाव के कारण वहां से आने वाले कोयले की आपूर्ति घटी है। नवंबर में चीन में कोयले के आयात में 19 फीसदी की गिरावट देखी गई। इन सबका असर बिजली के उत्पादन पर पड़ा है।
हुनान प्रांत में बिजली के सरकारी सप्लायर स्टेट ग्रिड हुनान के मुताबिक, अगले वसंत तक बिजली की उपलब्धता में 30 से 40 लाख किलोवाट की कमी रहने का अनुमान है। ग्रिड ने कहा है कि सिद्धांत रूप में नागरिकों के बिजली के उपभोग का स्तर बनाए रखने की गारंटी की जाएगी, लेकिन बिजली के पूर लोड को देखते हुए एडस्टमेंट करने पड़ेंगे।
जानकारों का कहना है कि जैसा कि चीन में अक्सर होता है। असली समस्या को समझना मुश्किल बना रहता है। समस्या यह है कि बिजली की कमी हो गई है और उसका असर कई राज्यों में आम जीवन पर पड़ रहा है, लेकिन सरकारी एजेंसियां इसे चीन के जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य से जोड़ कर पेश कर रही हैं।