जी-7 और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की बैठक का आम नतीजा यह रहा कि बाइडन अपनी चीन विरोधी मुहिम में यूरोप को साथ लेने में फिलहाल काफी हद तक कामयाब हो गए। बाइडन प्रशासन के अधिकारियों का आकलन है कि राष्ट्रपति यूरोपीय देशों को चीन में मानवाधिकारों के कथित दमन, वहां की तानाशाही, और आर्थिक क्षेत्र में नियमों के कथित उल्लंघन के खिलाफ लामबंद करने में सफल रहे।
विश्लेषकों ने कहा है कि बाइडन की यूरोप यात्रा से यह और साफ हो गया है कि अमेरिकी विदेश नीति में चीन अब सबसे अहम है। उसके खिलाफ दुनियाभर के देशों को लामबंद करना बाइडन प्रशासन का प्रमुख एजेंडा है। इसके लिए वह अपने उन सहयोगी देशों को भी फिर से अपने साथ जोड़ना चाहता है, जो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान बिदक गए थे। अमेरिकी आकलन के मुताबिक जी-7 सम्मेलन के दौरान बाइडन को यह भरोसा बंधा कि अब चीन को वैश्विक लोकतंत्र के लिए खतरा मानने की उनकी राय से बाकी देश भी सहमत हो गए हैं। इसीलिए वे चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का विकल्प पेश करने की अमेरिकी योजना पर सहमत हुए।
विश्लेषकों का कहना है कि जी-7 और नाटो की बैठक में हर देश के नेता की जुबान पर चीन छाया रहा। पहली बार उनकी साझा विज्ञप्तियों में चीन का नाम लेकर उसकी आलोचना की गई। नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि नाटो की चिंता भले यूरोप रही हो, लेकिन अब चीन सैनिक ताकत के मामले में ‘हमारे करीब आ रहा है।’ उन्होंने कहा कि ये कम्युनिस्ट देश उन उसूलों को नहीं मानता, जिनकी रक्षा के लिए नाटो की स्थापना की गई थी।
इसके बावजूद यूरोपीय मीडिया में चर्चा है कि कई यूरोपीय इस मामले में खुद को एक सीमा से ज्यादा उलझाने को लेकर असहज हैं। उनकी राय है कि ये टकराव मुख्य रूप से अमेरिका और चीन का है। इसके बीच यूरोपीय देशों को एक सीमा तक ही उलझना चाहिए। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन के मुताबिक कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने उसे बताया कि इटली और जर्मनी जी-7 की साझा विज्ञप्ति की भाषा को लेकर असहज थे। उनकी राय थी कि इससे चीन भड़केगा, जो यूरोप के हित में नहीं है। जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने तो खुल कर यह कहा कि इस मामले में संतुलित रुख अपनाने की जरूरत है।
मैर्केल ने कहा- ‘चीन कई मोर्चों पर हमारा प्रतिद्वंद्वी है, लेकिन कई मामलों में वह हमारा सहभागी भी है।’ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी ध्यान दिलाया कि जलवायु परिवर्तन, व्यापार, विकास, और कई दूसरे मुद्दों पर जी-7 को मतभेदों के बावजूद चीन के साथ मिल कर काम करना होगा। जी-7 की बैठक के बाद मैक्रों ने कहा- ‘मेरी इस बात को लेकर साफ राय है। जी-7 चीन के दुश्मनों का क्लब नहीं है।’
वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू के एक विश्लेषण में कहा गया है कि तमाम मुस्कुराहटों और अच्छी बातों के बावजूद यूरोपियन यूनियन के अधिकारी इसको लेकर नाराज हैं कि बाइडन ने यूरोप के खिलाफ अमेरिकी व्यापार युद्ध को खत्म नहीं किया है। डाटा ट्रांसफर, ग्रीन टैक्स लगाने और वैश्विक व्यापार न्यायालय के मुद्दों पर भी अमेरिका और ईयू के विवाद कायम हैँ। यूरोपीय देशों को यह शिकायत है कि बाइडन का ध्यान इन मुद्दों पर नहीं था। इसलिए साझा बयानों में ये देश भले अमेरिका की मंशा के मुताबिक दस्तखत करने पर राजी हो गए, लेकिन वे चीन विरोधी लामबंदी में बहुत दूर तक जाएंगे, इसकी संभावना कम है।