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तकरार: अमेरिका में अपने-अपने एजेंडे को लेकर आक्रामक हुईं दोनों पार्टियां

Wed, 10 Mar 2021 03:40 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

नए कानून के लागू होने के बाद अरकंसास राज्य में सिर्फ उन मामलों में गर्भपात कराया जा सकेगा, जिसमें मां की जान के लिए खतरा हो। यानी बलात्कार या पारिवारिक व्याभिचार के कारण ठहरे गर्भ को गिराना अब गैर-कानूनी हो जाएगा...
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us congress - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका में प्रगतिशील और कंजरवेटिव कार्यक्रमों को लागू करने को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। एक तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी के संघीय प्रशासन ने प्रगतिशील कोरोना वायरस पैकेज को पास कराया है और मतदान को आसान बनाने के उपायों वाले बिल को डेमोक्रेटिक बहुमत वाले हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने मंजूरी दी है, वहीं अरकंसास राज्य में रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाली राज्य विधायिका ने गर्भपात पर लगभग पूरी रोक लगा दी है। इसके ठीक एक दिन पहले रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाली जॉर्जिया की विधायिका ने मताधिकार संकुचित करने वाले बिल पर अपनी मुहर लगाई थी।

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अरकंसास राज्य के रिपब्लिकन गवर्नर असा हचिंसन ने गर्भपात विरोधी बिल पर मंगलवार को दस्तखत कर दिए। उन्होंने कहा कि वे जबरदस्त विधायी समर्थन और गर्भपात विरोधी अपनी पुरानी आस्था के कारण इस बिल पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। नए कानून के लागू होने के बाद अरकंसास राज्य में सिर्फ उन मामलों में गर्भपात कराया जा सकेगा, जिसमें मां की जान के लिए खतरा हो। यानी बलात्कार या पारिवारिक व्याभिचार के कारण ठहरे गर्भ को गिराना अब गैर-कानूनी हो जाएगा। गवर्नर ने कहा, यह प्रतिबंध अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय उदाहरणों से खिलाफ है, लेकिन इसके पीछे मकसद ऐसी जमीन तैयार करना है, जिससे सुप्रीम कोर्ट को मौजूदा संघीय कानून को पलटने का मौका मिले।

सोमवार को जॉर्जिया की विधायिका ने एक बिल पारित किया, जिससे ऐसे मामलों में डाक से मतदान को अवैध बना दिया गया है, जिसमें मतदान करने वाला इसके लिए पर्याप्त कारण ना बता पाए। गौरतलब है कि पिछले नवंबर में हुए चुनाव में दो दशक बाद इस राज्य में रिपब्लिकन पार्टी की हार हुई। बाद में जनवरी में हुए सीनेट के चुनाव में दोनों सीटें भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत लीं। पिछले चुनाव में जॉर्जिया में 13 लाख लोगों ने डाक से मतदान किया था।
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जॉर्जिया की विधायिका में एक और बिल पर चर्चा चल रही है, जिसमें मतदाताओं के स्वतः रजिस्ट्रेशन के नियम को खत्म करने का प्रावधान है। ये नियम 2016 में लागू हुआ था। उसके बाद राज्य में रजिस्टर्ड हुए 76 लाख मतदाताओं में से 50 लाख का नाम मतदाता सूची में इसी नियम के जरिए आया था। जानकारों के मुताबिक जॉर्जिया में बनाए जा रहे नए नियमों से ब्लैक समुदाय और गरीब तबकों के लिए मतदान करना मुश्किल हो जाएगा। माना जाता है कि ये तबके आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देते हैँ।

रिपब्लिकन बहुमत वाले राज्यों में वोटिंग अधिकारों को संकुचित करने के अलावा गर्भपात पर रोक लगाने की भी मुहिम चल रही है। इस साल अरकंसास के पहले 13 दूसरे राज्य भी गर्भपात पर पाबंदी की पहल कर चुके हैँ। जबकि अमेरिका में 1973 के ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को वैध करार दिया था। लेकिन अब रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाले राज्य ऐसे प्रावधान पारित कर रहे हैं, जिससे इस मुद्दे के फिर से सुप्रीम कोर्ट में जाने की स्थिति बन रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में कई कंजरवेटिव जजों की नियुक्ति हुई। रिपब्लिकन पार्टी को उम्मीद है कि इस बार जजों का बहुमत 1973 के फैसले को पलट देगा।

दूसरी तरफ प्रगतिशील कोरोना राहत पैकेज पारित कराने के बाद राष्ट्रपति जो बाइडन ने कर्मचारियों के यूनियन बनाने के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मंगलवार को बाइडन ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) का आह्वान किया कि वह ऐसा कानून पारित करे, जिससे मजदूरों के लिए यूनियन बनाना आसान हो जाए। राष्ट्रपति ने एक बयान में कहा, मैं हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव को पूरजोर ढंग से प्रोत्साहित कर रहा हूं कि वह संगठित होने के अधिकार के संरक्षण के लिए बिल पास करे। इससे मजदूरों के संगठित होने की संभावना बढ़ जाएगी और तब वे बेहतर वेतन, नौकरी संबंधी लाभ और कार्य स्थितियों के लिए सौदेबाजी कर पाएंगे।

बाइडन ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ा कर 15 डॉलर करने के प्रस्ताव को भी कोरोना राहत पैकेज में शामिल किया था। लेकिन वह तकनीकी कारणों से पास नहीं हो सका। अब डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रगतिशील धड़ा उसे अलग से पास कराने में जुटा है। विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पार्टियों की प्राथमिकता को देखते हुए ऐसा लगता है कि वे अपने-अपने एजेंडे के लिए सियासी युद्ध में उतर गई हैं।

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