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अमेरिका-चीन: ड्रैगन से रिश्तों को लेकर ट्रंप की गलतियां सुधारने में बाइडन को लगाना पड़ रहा है जोर, नई किताब में कई खुलासे

Wed, 10 Mar 2021 03:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

ट्रंप का ताइवान को लेकर कहना था, ‘ताइवान चीन से दो फीट की दूरी पर है। हम उससे आठ हजार मील दूर हैं। अगर चीन ने हमला कर दिया, तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे।’
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donald trump and xi jinping - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन के साथ अमेरिकी संबंधों को लेकर कैसा रुख रहा, इस पर एक नई किताब ने रोशनी डाली है। ये किताब अखबार वाशिंगटन पोस्ट के विदेश नीति संबंधी स्तंभकार जोश रोगिन ने लिखी है। किताब मंगलवार को जारी हुई। ‘केयॉस अंडर हेवेनः ट्रंप, शी एंड बैटल फॉर ट्वेंटी फर्स्ट्थ सेंचुरी’ नाम की इस किताब में ट्रंप प्रशासन की चीन नीति का विस्तार से ब्योरा दिया गया है। ट्रंप की चीन नीति उनके राष्ट्रपति बनने के बाद शुरुआती महीनों में समझौता और टकराव के रुख के बीच झूलती रही थी। विश्लेषकों का कहना है कि ये किताब जो बाइडन प्रशासन के समय आकार ले रही चीन नीति और उसकी अहमियत को समझने में सहायक साबित होगी।

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किताब में उन घटनाओं की अंदरूनी कथा बताई गई है, जो उस समय बड़ी सुर्खियां बनी थीं। इसमें ताइवान के राष्ट्रपति से ट्रंप की फोन पर हुई बातचीत का विवरण है। साथ ही फरवरी 2020 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई उनकी बातचीत का ब्योरा भी है, जिसे लेकर कई तरह की चर्चाएं रही हैं। जोश रोगिन ने पूर्व ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों खासकर व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार स्टीव बेनन, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिन्गर और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व निदेशक मैट टर्पिन के साथ हुई बातचीत से मिली जानकारियों को शामिल कर उस दौर की कहानी लिखी है।

इससे पता चलता है कि अपने कार्यकाल के पहले दो वर्षों में ट्रंप अपने उन अधिकारियों की योजनाओं में पलीता लगाते रहे, जिनका रुख चीन के प्रति आक्रामक था। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सौदों के मामलों में चीन के लिए फायदेमंद हालात बने। ट्रंप के कई समर्थक लंबे समय से ताइवान के समर्थक थे। जब उन्होंने इसके मुताबिक नीति बनाने की कोशिश की, तो एक मौके पर ट्रंप ने कहा- ‘ताइवान चीन से दो फीट की दूरी पर है। हम उससे आठ हजार मील दूर हैं। अगर चीन ने हमला कर दिया, तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे।’
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चीनी टेक कंपनी हुवावे के बारे में राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने चेतावनी दी थी ये कंपनी सुरक्षा के लिए खतरा है। लेकिन ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार वार्ताओं में बार-बार इस कंपनी को शामिल किया। इसी तरह एक बार ट्रंप ने चीन से निर्वासित कारोबारी गुओ वनगुई को वापस चीन भेजने का मन बना लिया था। गुओ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कड़े आलोचक हैं। लेकिन उन पर बलात्कार का इल्जाम लगा था।

किताब में दिए गए ब्योरे के मुताबिक ट्रंप ने बेनन से कहा था कि इस बलात्कारी से हमें मुक्ति पानी है। तब गुओ का प्रत्यर्पण ना हो, इसके लिए मैट पॉटिन्गर को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। फरवरी 2020 में शी जिनपिंग के साथ फोन पर हुई बातचीत में ट्रंप ने जो कहा, उसमें यह भी शामिल था कि गर्मी का सीजन आते ही कोरोना वायरस महामारी थम जाएगी। वैज्ञानिक नजरिए से यह बिल्कुल ही गलत आकलन था।

रोगिन की किताब से बड़ी तस्वीर यह उभरती है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल के चार वर्षों में कई रणनीतिक गलतियां कीं। उन्होंने अपने सहयोगी देशों का गलत आकलन किया। इसका नतीजा यह हुआ कि चीन के साथ अमेरिका की बढ़ी प्रतिस्पर्धा को दुनिया में इन दोनों देशों का आपसी विवाद समझा जाने लगा। जबकि अगर इसे चीन के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय जवाब के रूप में देखा जाता, जो वह अमेरिका के हित में अधिक होता। रोगिन ने लिखा है कि चीन ने भी ट्रंप और उनके प्रशासन का गलत आकलन किया। इससे वह ट्रंप और उनके प्रशासन की कार्यशैली को लेकर गलत निष्कर्षों पर पहुंचता रहा।

अब राष्ट्रपति जो बाइडन को ट्रंप की गलतियां सुधारने में काफी ऊर्जा लगानी पड़ रही है। उन्हें अपने सहयोगी देशों को समझाना पड़ रहा है कि चीन की महाशक्ति के रूप में उभरती हैसियत सिर्फ अमेरिका की चिंता नहीं है। बल्कि इसकी उन्हें भी उतनी ही चिंता करनी चाहिए।

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