राष्ट्रपति जो बाइडन ने मुद्रास्फीति में कमी अधिनियम और अन्य उपायों पर बात करते हुए पुष्टि की कि अमेरिका जलवायु परिवर्तन से लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए दोबारा तैयार है। संयुक्त राष्ट्र सीओपी-27 शिखर सम्मेलन में बोलते हुए बाइडन ने अपने भाषण के दौरान पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर होने को लेकर माफी भी मांगी।
बाइडन ने सीएनएन के हवाले से कहा, देश में बदलाव लाने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति का पद ग्रहण किया और अमेरिका को ये परविर्तन दुनिया के और देशों के लिए लाना होगा। जलवायु के लिए अमेरिका एक भरोसेमंद वैश्विक नेतृत्वकर्ता है और इसके लिए हमने बड़े कदम उठाए हैं।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका की वापसी के लिए माफी भी मांगी। बाइडन ने कहा, हम तुरंत पेरिस समझौते में फिर से शामिल हो गए। हमने प्रमुख जलवायु शिखर सम्मेलन आयोजित किए और फिर से स्थापित हुए, मैं माफी मांगता हूं कि हम कभी भी समझौते से बाहर हो गए।
बाइडन ने कहा, आखिरकार, आज हमारे द्वारा की गई कार्रवाई के लिए धन्यवाद, मैं यहां अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में खड़ा हो सकता हूं और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अमेरिका 2030 तक हमारे उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा कर लेगा।
यूक्रेन पर रूसी हमले को ठहराया जिम्मेदार
जीवाश्म ईंधन से हटने के कारणों में बाइडन ने यूक्रेन पर रूसी हमले को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अन्य देशों को भी जिम्मेदारी के रूप में उत्सर्जन से पैदा चुनौती के लिए कदम उठाने को कहा।
मिस्र के राष्ट्रपति से की मुलाकात
बाइडन ने 27वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के मौके पर मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों में तेजी लाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बाइडन ने सम्मेलन की मेजबानी के लिए राष्ट्रपति अल-सिसी को बधाई दी। दोनों नेताओं ने बहुमुखी यूएस-मिस्र रणनीतिक साझेदारी के लिए अपनी पारस्परिक प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
बाइडन-शी मुलाकात से अधिक उम्मीदें नहीं
इंडोनेशिया के बाली में सोमवार को होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के इतर राष्ट्रपति बाइडन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात में विवादित मुद्दों को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं हो सकेगा। इनमें ताइवान, मानवाधिकार और उत्तर कोरिया से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। दोनों नेता महामारी के बाद एक नए शीतयुद्ध की नए सिरे से बातचीत के दौरान पहली बार आमने-सामने आएंगे। इसे लेकर अधिक उम्मीदें नहीं जताई जा रही हैं।