दुनिया की सात विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह के नेताओं ने यहां चीन को लेकर इस बात पर चर्चा की कि चीनी चिंता को कार्रवाई में कैसे बदला जाए। इस बीच जापान के पीएम फुनियो किशिदा ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बैठक में चीन से संबंधित मुद्दों पर मिलकर काम करने और साझा चुनौतियों पर एकजुटता पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय मुद्दों पर वैचारिक आदान-प्रदान किया।
बाइडन और किशिदा ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र, विशेष रूप से पूर्वी एशिया में चीनी बल द्वारा यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास को बर्दाश्त न करने का संकल्प भी लिया। बाइडन इस वक्त जी-7 बैठक में हिस्सा लेने के लिए हिरोशिमा में हैं। दोनों नेताओं ने ताइवान स्ट्रेट में शांति-स्थिरता के महत्व को दोहराया और जापान-अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार समिति के आधार पर गठबंधन क्षमताओं को और मजबूत करने पर सहमति जताई। बाइडन ने जापान-दक्षिण कोरिया के बीच रिश्तों में सुधार का स्वागत किया।
बाइडन और किशिदा ने ग्लोबल साउथ का समर्थन करने की पुष्टि भी की। बता दें कि बाइडन प्रशासन गत दो वर्षों से वाशिंगटन और कुछ पश्चिमी लोकतंत्रों से मिलकर चीन के आर्थिक जबरदस्ती पर लगातार मजबूत प्रतिक्रिया देने की मांग करता रहा है। लेकिन जी-7 में जलवायु परिवर्तन, उत्तर कोरिया, यूक्रेन तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती संख्या की ऋण समस्याओं पर भी चीन से सहयोग की जरूरत बताई। एजेंसी
हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे पर चर्चा
बाइडन-किशिदा ने साझा होकर कहा कि क्षेत्र के आर्थिक क्रम में अमेरिकी जुड़ाव तेजी से अहम होता जा रहा है। उन्होंने हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचा (आईपीईएफ) पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के महत्व को साझा किया। जापानी विदेश मंत्रालय ने किशिदा के हवाले से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व स्थिरता को आधारशिला बताया।
चीनी ‘आर्थिक जबरदस्ती’ पर एकीकृत रणनीति
जी-7 की बैठक में ‘ग्रुप ऑफ सेवन’ के नेता चीन की ‘आर्थिक जबरदस्ती’ को लेकर एक एकीकृत रणनीति का संयुक्त रूप से समर्थन करेंगे। जी-7 में जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और इटली के साथ-साथ यूरोपीय संघ (ईयू) भी शामिल हैं।