जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने एक ऐसे नेता को विदेश मंत्री नियुक्त किया है, जिनकी छवि चीन-समर्थन की मानी जाती है। किशिदा ने बीते 31 अक्तूबर को हुए आम चुनाव में वादा किया था कि दोबारा सत्ता में आने पर वे राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेंगे। इस बीच विदेश मंत्री के उनके चयन को लेकर अब यहां कयास लगाए जा रहे हैं।
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में कुछ विश्लेषकों को यह कहते बताया गया है कि हयाशी चीन और ताइवान के मामले में बारीक नीति अपनाएंगे। अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन को बिना नाराज किए वे चीन और ताइवान के साथ संबंधों को सामान्य रखने की कोशिश करेंगे।
सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी में काम कर चुके विश्लेषक अत्सुओ इतो ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘हयाशी का चीन के प्रति दोस्ताना रुख है। लेकिन उन्हें चीन के प्रति बाइडेन प्रशासन की रणनीति की पूरी समझ भी है। उनके ऐसी नीति अपनाने की संभावना नहीं है, जिससे अमेरिका के साथ जापान के रिश्तों में तनाव पैदा हो।’
जापान में नई नियुक्ति पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किशिदा सरकार से अपील की कि वह चीन के साथ अपने मतभेदों पर सही रुख ले और चीन-जापान संबंधों को मिलजुल कर आगे बढ़ाए।
जापानी और विदेशी मीडिया में हयाशी की नियुक्ति ने काफी दिलचस्पी देखी गई है। मीडिया टिप्पणियों में कहा गया है कि ये नियुक्ति बताती है कि प्रधानमंत्री किशिदा अपनी राजनीतिक हैसियत को लेकर अब अधिक आश्वस्त हैं। उन्होंने इस नियुक्ति से यह संदेश दिया है कि उन्हें अपने खास लोगों को महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करने की पूरी आजादी हासिल है। हयाशी को सत्ताधारी पार्टी में किशिदा के गुट का ही नेता माना जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के इस्तीफा देने पर किशिदा अक्तूबर के आरंभ में प्रधानमंत्री बने थे। तब उन्होंने ज्यादातर अहम पद उन गुटों के नेताओं की दिए, जिन्होंने नेता पद के चुनाव में उनकी मदद की थी। लेकिन आम चुनाव के बाद जो मंत्रिमंडल उन्होंने बनाया है, उनमें ज्यादातर खास पद उन्होंने अपने विश्वस्त नेताओं को दिए हैं।