नेपाल के लोगों का नया आकर्षण जापान है। बड़ी संख्या में नेपाली जापान आकर काम की तलाश कर रहे हैं। खास कर उन्हें नर्सिंग सेंटर और दुकानों में काम मिल रहा है। जानकारों के मुताबिक ये ट्रेंड जापान में श्रमिकों की कमी को पूरा करने में सहायक बन रहा है। जापान की आबादी में युवा लोगों की कमी होती गई है। उसे देखते हुए शारीरिक श्रम वाले कार्यों में जापान को बाहरी लोगों पर आश्रित होना पड़ा है। नेपाल से आए लोगों को काम पर रखना वहां के उद्यमियों को सस्ता भी पड़ता है।
जापान के आव्रजन सेवा विभाग के मुताबिक 2021 के अंत तक जापान में 97,109 नेपाली थे। इस तरह अब जापान में मौजूद विदेशियों के बीच नेपालियों का स्थान छठा हो गया है। नेपाल से ज्यादा जिन देशों के लोग जापान में हैं, उनमें चीन, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और ब्राजील शामिल हैं। जापान में मौजूद नेपालियों की संख्या में पिछले 1.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यहां नेपाली अकेला समुदाय है, जिसकी संख्या में कोरोना महामारी के दौरान बढ़ोतरी दर्ज हुई।
जापानी भाषा की ट्रेनिंग और निजी कर्मचारी मुहैया कराने की सेवा देने वाली कंपनी मेइहोकू के सीईओ शोगो अदाची ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘नेपाली दयालु प्रकृति के होते हैं। वे परिवारों की पूरी देखभाल करते हैं। इसीलिए जापान के नर्सिंग केंद्रों में रहने वाले बुजुर्ग लोग नेपालियों से लगाव महसूस करते हैं।’ इन कंपनी ने चार साल पहले नेपालियों को यहां लाने के का काम शुरू किया था। अब तक वह तकरीबन 50 नेपाली कर्मियों को विभिन्न नर्सिंग सेंटरों और कंस्ट्रक्शन स्थलों को उपलब्ध करवा चुकी है।
उधर काठमांडू से खबर है कि अभी वहां से 14 लोग जापान रवाना होने की तैयारी में हैं। जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी के स्थानीय कार्यालय के मुताबिक काठमांडू में जापानी सिखाने वाले ट्रेनिंग सेंटर करीब 300 नेपाली ये भाषा सीख रहे हैं। जापान में मौजूद नेपालियों में कर्मचारी, उनके परिजन और छात्र शामिल हैं। जो छात्र यहां पढ़ाई करते हैं, उनमें से कई यहां पार्टटाइम नौकरी भी करते हैं। यहां मौजूद नेपालियों में 30 वर्ष से कम उम्र वाले लोगों की संख्या 60 फीसदी है। जानकारों के मुताबिक दो करोड़ 90 लाख आबादी वाले देश नेपाल में खेती और पर्यटन उद्योग के अलावा रोजगार के अवसर सीमित हैं। इसीलिए वहां के नौजवान विदेश में नौकरी करने को प्राथमिकता देते हैं।