जापान में हो रहे आम चुनाव के जरिए पीएम ताकाइची अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करना चाहती हैं। चीन के साथ बढ़ते तनाव और वाशिंगटन की अनिश्चित नीतियों के बीच देश की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ताकाइची अपने दक्षिणपंथी एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं।
रविवार यानी आज जापान में निचले सदन के लिए मतदान हो रहा है। यह मतदान प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के लिए जनमत संग्रह की तरह देखा जा रहा है और इस चुनाव से सनाए तकाइची का सियासी भविष्य तय होगा। मुख्य मुकाबला सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और विपक्षी ब्लॉक के बीच है।
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जापान चुनाव में महंगाई अहम मुद्दा
जापान चुनाव में महंगाई और किफायती चीजों की उपलब्धता अहम मुद्दे हैं। मजदूरी में बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई से आम जनता परेशान है। 2023 में खराब फसल के कारण चावल की कीमतों में करीब 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। येन के कमजोर होने के कारण रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें भी काफी महंगी हो गई हैं।
प्रधानमंत्री ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और जापान इनोवेशन पार्टी का गठबंधन अगर 310 सीटें जीतता है तो वह विपक्ष के नियंत्रण वाले संसद के ऊपरी सदन में बहुमत प्राप्त कर लेगा।
ताकाइची ने बहुमत नहीं पाने की स्थिति में पद छोड़ने का वादा किया है।
एक सप्ताह पहले तक लगभग 46 लाख लोगों ने प्रारंभिक मतदान किया था, जो 2024 के पिछले चुनाव की तुलना में 2.5 प्रतिशत कम है। मतदान में गिरावट का कारण उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी को बताया गया है।
मतदाता 289 एकल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में सांसदों का चुनाव करेंगे, शेष सीटों का निर्णय पार्टियों के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व मतदान द्वारा किया जाएगा।
विपक्ष का बिखराव ताकाइची को दे सकता है फायदा
अति रूढ़िवादी नेता ताकाइची ने अक्तूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था। उनकी कार्यशैली और 'काम, काम, काम' का नारा युवा समर्थकों के बीच खासा लोकप्रिय है। नये सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को निचले सदन में भारी जीत मिल सकती है। एक नए मध्यमार्गी गठबंधन के गठन और बढ़ते दक्षिणपंथी दलों के बावजूद, विपक्ष इतना बिखरा हुआ है कि वह एक वास्तविक चुनौती पेश करने में सक्षम नहीं है।