जापान: कुबुकी नाट्यकला की प्रस्तुति देते बच्चे।
बच्चों को कुबुकी सिखाने की जिम्मेदारी गांव में 82 साल की शिक्षिका इचिकावा पर है। वह मानती हैं कि दामिन का कुबुकी आयोजन क्षेत्र में सबसे प्राचीन है, लेकिन वे नहीं जानतीं कि इसे कब तक बचाए रख सकेंगे। इसे सिखाने के लिए अब शिक्षक भी नहीं बचे। वे कहते हैं कि उनके जाने के बाद शायद पुरानी वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिये ही बच्चों को सिखाने का रास्ता बचेगा।
किसी तरह यह कला बचा रहे ग्रामीण
दामिन के लोग ही कुबुकी स्कूल को बचाए हुए हैं, आसपास के गांवों में बच्चों के अभाव में बंद हो चुके हैं। इसकी वजह जापान की बढ़ती बुजुर्ग आबादी व शहरों की ओर पलायन है। ग्रामीण मानते हैं, यह स्कूल बंद हुआ तो गांव की आत्मा ही मर जाएगी।
ताकिको ताकेशिता 30 वर्ष की थी जब अपनी जुड़वां बेटियों को अच्छा वातावरण देने दामिन गांव आई थी। गांव में बेटियों ने शानदार बचपन गुजारा, ताकेशिता को भी पास के चाय बागान में काम मिला। आज बड़ी होकर यही बेटियां बाकी बच्चों की तरह काम के लिए शहर लौट गईं। एक बेटी नर्स है और दूसरी पुलिस अधिकारी। पूरे शितारा शहर में काम की कमी है, यहां केवल वृद्धजनों की देखभाल के काम बढ़ रहे हैं।
शोगन के समय शुरू हुई थी परंपरा
जापान पर 12वीं से 17वीं शताब्दी में करीब 700 वर्ष शोगुन सैन्य तानाशाहों का नियंत्रण रहा। 370 वर्ष पूर्व दामिन की यह नाट्यकला अस्तित्व में आई। दामिन के लोगों के बीच प्रसिद्ध किंवदंती है कि कुबुकी आयोजनों की शुरुआत एक चमत्कार से हुई। दामिन के लोगों को कानन देवी ने बड़े संकट से बचाया था। बदले में हर वर्ष कुबुकी पर्व मनाने का वचन लिया था। द्वितीय विश्व युद्ध में भी यह आयोजन होता रहा।