पूअर की टीम ने वैसा ही इलाज चार अन्य गंभीर मरीजों पर भी अपनाया। इनमें से एक तो नहीं बचा लेकिन तीन मरीजों में आश्चर्यजनक रूप से ऑक्सीजन का स्तर बढ़ गया। हालांकि ये मरीज अभी वेंटिलेटर पर है लेकिन इनमें पहले से सुधार है। इसे देखते हुए पूअर ने असामान्य थक्का बनने (क्लॉटिंग) से मरीजों की हालत बिगड़ने को लेकर जल्द से जल्द एक अध्ययन करने की मांग की है।
कई अन्य शोध में भी उम्मीद
पूअर के अलावा हाल ही में यूनिवर्सिटी फप कोलोराडो और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने टीपीए दवा पर शोध प्रकाशित किया है। इसमें कोलोराडो और मैसाचुसेट्स में तीन अन्य मरीजों पर भी इसके इस्तेमाल का जिक्र किया है।
विशेषज्ञ इस घटना को छोटे रक्त थक्कों से फेफड़ों में रुकावट खड़ी होने के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है, डॉ. पूअर रक्त थक्के तोड़कर ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के साथ फेफड़ों को सुरक्षित कर पाने में सफल रहे।
चीनी डॉक्टरों ने चेताया था
चीनी डॉक्टरों ने मार्च में ही अमेरिका कॉलेज ऑफ कॉर्डियोलॉजी को बताया था कि उन्हें कुछ मरीजों के रक्त में अचानक थक्के बढ़ते दिख रहे थे। पर इन थक्कों के शरीर पर प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं थी।