मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने मंगलवार को लाहौर हाई कोर्ट में टेरर फंडिंग के मामलों पर अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया और उस पर एक करोड़ डॉलर का ईनाम घोषित कर रखा है।
एक नई याचिका में, सईद और प्रतिबंधित जमात-उद-दावा (जेयूडी) के 67 अन्य नेताओं और इसकी चैरिटी शाखा फलाह-ए-इंसानियत (एफआईएफ) ने अपने खिलाफ टेरर फंडिंग (आतंकी वित्तपोषण) के दर्ज एफआईआर को लाहौर हाई कोर्ट में अपने वकीलों एके डोगर, अहमद अबदुल्ला डोगर और गुलाम यासीन भट्टी के माध्यम से चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने मामले में आंतरिक मंत्रालय, पंजाब गृह विभाग और पंजाब पुलिस की आतंकरोधी शाखा को प्रतिवादी बनाया है। अदालत इस मामले की सुनवाई बाद में तय करेगी।
सईद को टेरर फंडिंग के एक मामले में 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। लाहौर से करीब 200 किलोमीटर दूर पंजाब प्रांत में स्थित गुजरात में आतंकरोधी अदालत (एटीसी) दो सितंबर को मामले की सुनवाई करेगी। उसे उच्च सुरक्षा में लाहौर के कोट लखपत जेल में रखा गया है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जेयूडी प्रमुख सईद और अन्य 67 लोग लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य नहीं हैं और न ही इसके साथ कोई सांठगांठ है। उन्होंने इस संबंध में अदालतों की कुछ पिछली टिप्पणियों का भी हवाला दिया।
सईद और अन्य लोगों ने लाहौर हाई कोर्ट से प्रार्थना की कि इस याचिका में विस्तृत संपत्ति को, "मस्जिदों के उद्देश्य के लिए समर्पित घोषित किया जाए, और वे इस तरह से इस्तेमाल किए जा रहे हैं इसलिए एफआईआर बिना कानूनी अधिकार और बिना किसी कानूनी प्रभाव के हैं।"