विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की। इनमें संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी शामिल हैं। इन बैठकों में उन्होंने भू-राजनीतिक हालात और सहयोग पर चर्चा की।
जयशंकर ने अल्जीरिया के विदेश मंत्री अहमद अत्ताफ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत और अल्जीरिया की साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी अपने विचार साझा किए। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, अल्जीरिया के विदेश मंत्री अत्ताफ से मिलकर अच्छा लगा। साझेदारी मजबूत करने और पश्चिम एशिया पर चर्चा की।
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उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिति पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, यूएनजीए में सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से मुलाकात की। द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्र स्थिति पर चर्चा हुई।
इन द्विपक्षीय बैठकों के अलावा जयशंकरने संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, आज न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। यूएनजीए, यूएन एट 80, वैश्विक राजनीतिक, मौजूदा संकट और भारत के नजरिए पर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने यूएनजीए की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक से भी मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, यूएनजीए की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक से मिलकर खुशी हुई। भारत उनकी अध्यक्षता के लिए पूरा समर्थन देगा। भारत संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर उसे समय के अनुसार प्रासंगिक और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करता रहेगा।
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यूएन में क्या बोले जयशंकर
दिन की शुरुआत में जयशंकर ने यूएनजीए के 80वें सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अपना स्वतंत्र दृष्टिकोण बनाए रखेगा और वैश्विक दक्षिण यानी विकासशील देशों की आवाज बना रहेगा। उन्होंने कहा, भारत आज की दुनिया का सामना तीन प्रमुख सिद्धांतों के साथ करता है। पहला- आत्मनिर्भरता। दूसरा आत्मरक्षा- हम अपने लोगों की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे वो देश के भीतर हों या बाहर। इसका मतलब आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, सीमाओं की रक्षा, वैश्विक साझेदारियां और प्रवासी भारतीयों की मदद है। और तीसरा- आत्मविश्वास। इसका मतलब है कि भारत अपनी स्वतंत्र सोच बनाए रखेगा और वैश्विक दक्षिण की आवाज बना रहेगा।