तीन दिनी रूस यात्रा पर मॉस्को पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक व्याख्यान में कहा कि पिछले एक साल से भारत-चीन संबंधों को लेकर बहुत चिंता उत्पन्न हुई है। बीजिंग सीमा मुद्दे को लेकर समझौतों का पालन नहीं कर रहा है, इस वजह से द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद 'गड़बड़ा' रही है।
भारत-चीन के बीच परमाणु होड़ नहीं
भारत व चीन के बीच परमाणु हथियारों की होड़ की संभावना से जुड़े एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने इसे खारिज करते हुए कहा कि चीन के परमाणु कार्यक्रम का विकास भारत से कहीं अधिक बड़े पैमाने पर है। उन्होंने कहा, 'मैं नहीं मानता कि भारत और चीन के बीच परमाणु हथियारों की होड़ है। चीन 1964 में परमाणु शक्ति बन गया था जबकि भारत 1998 में।'
भारत-रूस के संबंध दुनिया के सबसे प्रमुख स्थिर संबंधों में से एक
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सबसे प्रमुख स्थिर रिश्तों में से एक हैं और भारत वार्षिक द्विपक्षीय शिखर-सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के स्वागत को उत्सुक है।
जयशंकर ने कहा कि इन रिश्तों को कई बार हल्के में लिया जाता है। उन्होंने कहा कि इन संबंधों का सतत रूप से समृद्ध होना एक बड़ा कारक है। उन्होंने कहा, 'इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सबसे स्थिर संबंधों में से एक हैं। जहां तक द्विपक्षीय संबंधों की बात है, कई बदलाव हुए हैं और समय-समय पर कुछ मुद्दे रहे हैं। लेकिन अंततोगत्वा भू-राजनीति का तर्क इतना अकाट्य है कि हम इन बदलावों को महज छोटी-मोटी बात समझकर याद रखते हैं।'
मोदी-पुतिन के बीच 19 बार मुलाकात
जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2014 से अब तक 19 बार मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने कहा, 'यह तथ्य अपने आप में काफी कुछ बयां करता है। हम निश्चित रूप से वार्षिक द्विपक्षीय शिखर-सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन के भारत में आगमन पर स्वागत को लेकर उत्सुक हैं।