अमेरिका जाने वाले भारतीयों की पहली लहर में ज्यादातर सिख शामिल थे। वो पिछली सदी की शुरुआत में कनाडा से होकर अमेरिका पहुंचे थे। वहां ये खेतों और लकड़ी की मिलों में काम करते थे। दूसरे एशियाई देशों की तरह इन्हें भी नस्लीय भेदभाव झेलना पड़ा। 1917 के इमिग्रेशन एक्ट के तहत एशियाईयों पर रोक लगा दी गई।
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1960 में अमेरिकी सिविल राइट्स मूवमेंट चला। 1965 में इमिग्रेशन मशीनरी को खत्म कर दिया गया। इसमें पड़ोसी देशों को छोड़कर सभी देशों के लिए 20,000 सालाना कोटा कर दिया गया।, इससे भारतीय प्रवासियों के लिए रास्ता खुल गया।
कमाई और पढ़ाई में अमेरिकियों से आगे
मौजूदा समय में लगभग 31.80 लाख भारतीय मूल के लोग अमेरिका निवासी हैं। 32 फीसदी अमेरिकियों की तुलना में 72 फीसदी भारतीय प्रवासियों के पास ग्रेजुएशन या उससे बड़ी डिग्री है। भारतीयों की औसतन सालाना आय एक लाख डॉलर यानी कि 73 लाख रुपये है, जो अमेरिकी परिवारों से दोगुनी है।
भारतीय-अमेरिकी सिलिकॉन वैली की ड्राइविंग फोर्स है। तीन सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को भारतीय-अमेरिकी लीड कर रहे हैं। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट में सत्य नडेला और आईबीएम में अरविंद कृष्ण हेड हैं। टेक सेक्टर में विनोद खोसला सबसे बड़ा नाम है। वह सनमाइक्रो सिस्टम के फाउंडर हैं। एक अनुमान के मुताबिक सिलिकॉन वैली में दो लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं।
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इसके अलावा पांच भारती-अमेरिकियों ने पुलित्जर पुरस्कार जीता है। भारतीयों ने लॉ फील्ड में भी अपनी पहचान बनाई है। श्री श्रीनिवासन फेडरल कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के चीफ जज हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के बाद सबसे अहम कोर्ट है।