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ट्रंप से बदला लेने की फिराक में ईरान: इवांका की हत्या की साजिश रचने का दावा, IRGC से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार

Sat, 23 May 2026 08:28 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका में इवांका ट्रंप की हत्या की कथित साजिश को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तार इराकी नागरिक मोहम्मद अल-सादी पर आरोप है कि वह आईआरजीसी से जुड़ा था और कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसके पास इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा भी मिला। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
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इवांका ट्रंप के हत्या की साजिश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के परिवार को निशाना बनाने की कथित साजिश ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। दावा किया गया है कि ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की योजना बनाई गई थी। इस मामले में गिरफ्तार इराकी नागरिक मोहम्मद बाकेर साद दाऊद अल-सादी पर आरोप है कि वह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी से जुड़ा हुआ था और ट्रंप परिवार से बदला लेना चाहता था। 
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अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अल-सादी के पास इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा भी मिला था। बताया जा रहा है कि यह कथित साजिश ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में हुई मौत का बदला लेने के लिए रची गई थी।

आखिर इवांका ट्रंप को निशाना बनाने का आरोप क्यों लगा?
रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद अल-सादी ट्रंप परिवार के खिलाफ बदले की भावना रखता था। दावा किया गया है कि कासिम सुलेमानी की मौत के बाद वह लोगों से कहता था कि “ट्रंप ने हमारा घर जलाया है, इसलिए हमें इवांका को मारना होगा।” सूत्रों के अनुसार उसके पास फ्लोरिडा में इवांका ट्रंप और उनके पति जैरेड कुशनर के घर से जुड़ी जानकारी और नक्शा भी मौजूद था। सोशल मीडिया पर उसने फ्लोरिडा के उस इलाके का नक्शा साझा किया था, जहां इवांका का घर स्थित है। साथ ही उसने अरबी भाषा में धमकी भरा संदेश भी लिखा था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां भी उन्हें नहीं बचा पाएंगी। इस घटना के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।
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गिरफ्तार आरोपी पर कौन-कौन से आरोप लगे हैं?
  • 32 वर्षीय मोहम्मद अल-सादी को 15 मई को तुर्किये में गिरफ्तार किया गया।
  • गिरफ्तारी के बाद उसे अमेरिका लाया गया।
  • अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार उस पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों की कोशिशों का आरोप।
  • जांच एजेंसियों का दावा है कि वह अमेरिका और यहूदी समुदाय से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने में शामिल था।
  • एम्स्टर्डम में बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलॉन पर फायरबॉम्ब हमले में नाम जुड़ा।
  • लंदन में दो यहूदी नागरिकों पर चाकू से हमले का आरोप।
  • टोरंटो स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर गोलीबारी में कथित भूमिका।
  • बेल्जियम के लीज शहर में यहूदी उपासना स्थल पर बम धमाके से नाम जुड़ा।
  • रॉटरडैम में धार्मिक स्थल में आगजनी के आरोप भी लगे।
  • कई अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी गतिविधियों और हमलों की साजिश में शामिल होने की जांच जारी है।

आरोपी के ईरान और आतंकी संगठनों से कैसे संबंध बताए गए?
रिपोर्टों के मुताबिक अल-सादी को आईआरजीसी और काताइब हिजबुल्लाह जैसे संगठनों से जुड़ा बताया गया है। दावा किया गया कि वह बचपन में तेहरान भेजा गया था, जहां उसने आईआरजीसी से प्रशिक्षण लिया। बाद में उसने धार्मिक यात्राओं से जुड़ी ट्रैवल एजेंसी शुरू की, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर दुनिया भर में आतंकी नेटवर्क से संपर्क बनाने के लिए किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह कासिम सुलेमानी को पिता समान मानता था और उनकी मौत के बाद बदले की भावना से काम कर रहा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सुलेमानी के बाद आईआरजीसी के कमांडर इस्माइल कानी के साथ भी उसके करीबी संबंध थे।
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सोशल मीडिया और यात्रा नेटवर्क ने कैसे बढ़ाई चिंता?
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अल-सादी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था। उसकी तस्वीरें पेरिस के एफिल टॉवर, कुआलालंपुर के पेट्रोनास टावर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय जगहों पर दिखाई दीं। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार उसने अपने सोशल मीडिया खातों पर सैन्य ठिकानों, नक्शों और कासिम सुलेमानी के साथ बैठकों से जुड़ी तस्वीरें भी साझा की थीं। उसके पास इराक का विशेष सेवा पासपोर्ट भी था, जिससे वह आसानी से कई देशों की यात्रा कर सकता था। अमेरिकी एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्क कितने बड़े थे और क्या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
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