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इटली से ग्राउंड रिपोर्ट : बेबसी... आखिरी समय परिजनों को देखे बगैर दुनिया से रुखसत हो रहे बुजुर्ग

रचना शर्मा, मिलान से अमर उजाला के लिए विशेष रिपोर्ट Published by: योगेश साहू Updated Sun, 29 Mar 2020 07:07 AM IST
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सबसे ज्यादा मौत इटली में ही हुई हैं - फोटो : PTI

तकरीबन छह करोड़ की आबादी वाला देश इटली इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस ने इटली में तबाही मचा दी है। अब तो जैसे मौत भी यहां पनाह मांग रही है। अकेले शुक्रवार को यहां 24 घंटे में 969 लोगों की मौत हो गई।

अब तक किसी भी देश में एक दिन में मरने वालों की यह सबसे बड़ी संख्या है। यहां 51 डॉक्टर भी अब तक जान गंवा चुके हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि संक्रमण से जान गंवा रहे वायरस के खतरे और लॉकडाउन की वजह से अंतिम समय में अपने परिजनों को देख तक नहीं पा रहे।



मिलान और आसपास के शहरों के अस्पतालों से ऐसे कई वीडियो आए हैं। अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग अपने परिजनों से मिलना चाहते हैं। वह अपने अंतिम समय में हैं, लेकिन संक्रमण के डर की वजह से ऐसा संभव नहीं है।

यह सोचकर बेहद मन बेहद व्यथित हो जाता है कि इन बुजुर्गों को अपने अंतिम समय में न केवल किसी परिजन का चेहरा देखने का अवसर नहीं मिल सका, बल्कि उनके अंतिम संस्कार में भी परिजन शरीक नहीं हो पाए। प्रशासन की ओर से भेजी जा रहीं मृतकों और अंतिम क्रिया से जुड़ी जानकारियां ही परिजनों के पास पहुंच रही हैं।

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सबसे ज्यादा मौत इटली में ही हुई हैं - फोटो : PTI
तकरीबन छह करोड़ की आबादी वाला देश इटली इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस ने इटली में तबाही मचा दी है। अब तो जैसे मौत भी यहां पनाह मांग रही है। अकेले शुक्रवार को यहां 24 घंटे में 969 लोगों की मौत हो गई।

अब तक किसी भी देश में एक दिन में मरने वालों की यह सबसे बड़ी संख्या है। यहां 51 डॉक्टर भी अब तक जान गंवा चुके हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि संक्रमण से जान गंवा रहे वायरस के खतरे और लॉकडाउन की वजह से अंतिम समय में अपने परिजनों को देख तक नहीं पा रहे।

मिलान और आसपास के शहरों के अस्पतालों से ऐसे कई वीडियो आए हैं। अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग अपने परिजनों से मिलना चाहते हैं। वह अपने अंतिम समय में हैं, लेकिन संक्रमण के डर की वजह से ऐसा संभव नहीं है।

यह सोचकर बेहद मन बेहद व्यथित हो जाता है कि इन बुजुर्गों को अपने अंतिम समय में न केवल किसी परिजन का चेहरा देखने का अवसर नहीं मिल सका, बल्कि उनके अंतिम संस्कार में भी परिजन शरीक नहीं हो पाए। प्रशासन की ओर से भेजी जा रहीं मृतकों और अंतिम क्रिया से जुड़ी जानकारियां ही परिजनों के पास पहुंच रही हैं।

एकाकी जीवन बड़ी समस्या

मेरे पड़ोस में एक वर्ष पहले एक बुजुर्ग दंपती आए थे। पिछले हफ्ते दोनों संक्रमित हुए और दोनों की मौत हो गई। आज (शनिवार) सुबह ही हमारे पड़ोस में एक बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब होने पर इलाज के लिए ले जाया गया। मेरी हाउसिंग सोसायटी में 30 फ्लैट हैं। इनमें से अधिकतर बुजुर्ग हैं।

बहुत सारे अकेले रहते हैं क्योंकि उनके बेटे-बेटियां दूसरे शहरों में काम करते हैं। पड़ोस में रहने वाली इतालवी महिला एल्दा रेटी की कोई संतान नहीं है। उनके पति का देहांत हो चुका है। जिनके बच्चे हैं, लॉकडाउन के बाद वे भी उनसे मिलने नहीं आ सके हैं। एकाकीपन जीवन को कठिन बना रहा है। परिणाम, इटली में मरने वालों में 80 से 85% की उम्र 65 वर्ष से अधिक है।

भयावह आंकड़े : लोगों में घर कर रही हताशा

इटली में संक्रमितों की मृत्युदर 9% से अधिक है। 80 वर्ष से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों में यह 21% के करीब है। इस समय यह भयावह तथ्य सभी को परेशान कर रहा है। सभी अपने परिवार में मौजूद बुजुर्गों को लेकर बेहद चिंतित हैं और हर तरह के प्रयास कर रहे हैं ताकि उन्हें किसी तरह संक्रमण की चपेट में आने से बचा सकें। हताशा इतनी है कि बुजुर्गों में संक्रमण मिलने पर ही सभी घबरा जा रहे हैं।

मौत के बाद भी सुकून नहीं, अपने शहर में दफन होने को जगह भी नहीं मिल रही

हालात ऐसे हैं कि मौत के बाद भी सुकून नहीं। मिलान से कुछ ही दूरी पर बेगार्मो शहर है, जो संक्रमण का केंद्र बन चुका है। यहां वायरस ने ऐसी भयानक तबाही मचाई कि कब्रिस्तान भर चुके हैं। ताबूत एक जगह जमा कर गाड़ियों में रखकर दूसरे शहर भेजे जा रहे हैं।

वहां भी सभी को दफनाने लायक जगह नहीं मिलती तो दाह संस्कार कर अंतिम क्रिया पूर्ण की जा रही है। हालात धर्म या परंपराओं का सम्मान नहीं करते, शायद इसीलिए इसे आपात हालात कहा जाता रहा है।
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