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Space: नासा और इसरो ने मिलकर खोला ब्लैक होल का रहस्य, हर 48 घंटे में तारों के मलबे के चक्र से टकरा रही चीजें

Sat, 12 Oct 2024 05:50 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।

सार

Space: खगोलविदों ने एक अनोखी खगोलीय घटना का पता लगाया है। जिसमें एक विशाल ब्लैक होल दो खगोलीय पिंडों को बाधित कर रहा है, जिनमें से एक तारा है।
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ब्लैक होल - फोटो : Freepik
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विस्तार
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खगोलविदों ने एक अनोखी खगोलीय घटना का पता लगाया है। जिसमें एक विशाल ब्लैक होल दो खगोलीय पिंडों को बाधित कर रहा है, जिनमें से एक तारा है। यह खोज नासा के विभिन्न अनुसंधान केंद्रों, एनआईसीईआर और हबल ने भारतीय अंतरिक्ष आधारित खगोल विज्ञान उपग्रह के सहयोग से की है। इस खोज में बड़े ब्लैक होल के चारों ओर तारों के मलबे के व्यवहार के बारे में नई जानकारी मिली है। 

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साल 2019 में खगोलविदों ने एक तारे को विशाल ब्लैक होल के बहुत करीब जाते हुए देखा था। यह तारा गुरुत्वाकर्षण बल के कारण नष्ट हो गया था। इसे ज्वारीय विच्छेदन घटना (टीडीई) कहा जाता है। इस तारे के टूटने के बाद उसके अवशेषों ने एक चक्र बनाया, जिसे 'अधिग्रहण चक्र' कहा जाता है। यह चक्र ब्लैक होल के चारों ओर घूमता है और उसमें तारे के टुकड़े होते हैं। कई वर्षों तक यह चक्र स्थिर रहा, लेकिन हाल ही में खगोलविदों ने देखा कि यह चक्र बड़ा हो गया है और एक दूसरी वस्तु से टकराने लगा है। यह दूसरी वस्तु एक तारा हो सकती है या एक छोटा ब्लैक होल हो सकता है, जो पहले कक्षा में सुरक्षित दूरी पर था। 

अब यह दूसरी वस्तु हर 48 घंटे में तारों के मलबे के चक्र से टकरा रही है। जब यह टकराती है तो हर बार एक्स-रे का तेज विस्फोट होता है। क्वीन यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के मैट निकोल ने समझाते हुए कहा, जैसे एक तैराक बार-बार पानी में कूदता है और हर बार पानी के छींटे पड़ते हैं। यहां तारा तैराक की तरह है और चक्र पानी की तरह है, जो गैस व एक्स-रे का एक प्रकार का छींटा बनाता है। 
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खगोलविदों ने लंबे समय से ज्वारीय विच्छेदन घटनाओं का अध्ययन किया है, जिनमें एक तारा एक ब्लैक होल के कारण जोरदार विस्फोट में नष्ट होता है। लेकिन हाल ही में एक नई घटना देखी गई है, जिसे अर्ध-नियमित विस्फोट (क्यूपीईएस) कहते हैं। ये विस्फोट आकाशगंगाओं के केंद्र से निकलने वाली तेज एक्स-रे की चमक हैं, जो समय-समय पर होती हैं। पहले इन विस्फोटों को सही तरीके से समझा नहीं गया था। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के धीरज पशाम ने कहा, इस प्रकार की घटनाओं के बीच संबंधन को लेकर बहुत अटकलें थीं। लेकिन अब हमने इसका सबूत खोज निकाला है। उन्होंने कहा, यह दो खगोलीय रहस्यों को एक साथ सुलझाने जैसा है। 



इस घटना को अब एटी2019 किज नाम दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर नासा के एनआईसीईआर उपकरण ने एटी2019 किज की निगरानी की और पुष्टि की कि एक्स-रे विस्फोट हर 48 घंटे में होते हैं। नासा के स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी और भारत के एस्ट्रोसेट टेलीस्कोप से मिली अन्य जानकारी ने इन निष्कर्षों को और पुख्ता किया। जैसे-जैसे अधिग्रहण चक्र बड़ा हुआ और यह दूसरी वस्तुओं से टकराने लगा, नासा के चंद्र ऑब्जर्वेटरी ने कई घंटों में एक्स-रे की तीन अलग-अलग रिकॉर्डिंग की। ये रिकॉर्डिंग बार-बार होने वाले विस्फोटों का साफ सबूत देते हैं। 

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