इस्राइल ने बुधवार को रैपिड कोविड-19 (कोरोना वायरस) टेस्ट की नई तकनीक विकसित करने में भारत के सहयोग को ‘अद्भुत’ बताते हुए उसकी जमकर तारीफ की। साथ ही उम्मीद जताई कि दोनों देशों के इस संयुक्त प्रयास से विश्व को अगले कुछ महीनों में ‘अच्छी खबर’ मिलेगी।
सूत्रों का कहना है कि इस तकनीक के परीक्षण के लिए 26 जुलाई को भारत पहुंची इस्राइली टीम अगले कुछ दिन में 20 हजार से ज्यादा भारतीय कोरोना मरीजों का सैंपल जुटाएगी।
बता दें कि इस्राइली और भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर संयुक्त काम करते हुए रैपिड कोरोना टेस्ट की एक नई तकनीक ईजाद की है, जो महज कुछ सेकंड के अंदर ही परिणाम बता देती है।
इस्राइल के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसके तहत काम करने वाले रक्षा शोध व विकास महानिदेशालय (डीडीआरएंडडी) और इस्राइली विदेश मंत्रालय चार इस्राइली डाइग्नोस्टिक तकनीक के टेस्ट और सत्यापन के लिए सैंपल लेने का काम पूरा कर लिया है।
मंत्रालय के बयान में भारत के लिए इस्राइल के डिफेंस अटैचे कर्नल असल मालर ने कहा, हमारा लक्ष्य विश्व को महज कुछ सेकंड में रैपिड कोरोना टेस्ट को अंजाम देने की तकनीकी योग्यता उपलब्ध कराना है, जिससे एयरपोर्टों, कार्यालयों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों और अन्य जगहों को खोला जा सके।
उन्होंने कहा, इस परियोजना में भारतीय सहयोग अद्भुत था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैज्ञानिक सलाहकार समेत सभी शोध व विकास संस्थाओं ने इस अभियान में पूरी क्षमता से भागीदारी की। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में हम विश्व को अच्छी खबर सुनाने में सफल हो जाएंगे।
यह हैं नई तकनीक के चार टेस्ट
वॉयस टेस्ट, टेररा-हर्ट्ज वेव्स पर आधारित ब्रीथलाइजर टेस्ट, आइसोथर्मल टेस्ट और पॉलीअमीनो एसिड टेस्ट।