बेंजामिन नेतन्याहू और बेनी गैंट्ज
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इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज ने मंगलवार को आपस में मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए की गई ताकी आपातकालीन गठबंधन सरकार के गठन के बारे में कोई समझौता हो सके। दरअसल अगर आपातकालीन गठबंधन सरकार बनती है, तो कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए हालातों से निपटा जा सकेगा। इसके साथ ही मुश्किल के इस दौर में एक और खर्चीले चुनाव को टाला जा सकेगा।
इस मामले पर राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू और पूर्व सैन्य प्रमुख बेनी गैंट्ज को बातचीत पूरी करने के लिए कहा है। इस दौरान नेतन्याहू और गैंट्ज दोनों ही नेताओं ने अपनी बातचीत में जरूरी प्रगति की सूचना दी।
ऐसे में राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन की जिम्मेदारी में गठबंधन के लिए वार्ताओं पर नजर रखना शामिल है। राष्ट्रपति ने कहा कि वह समझ रहे हैं कि बातचीत में दोनों नेता करीब आए हैं। इस दौरान राष्ट्रपति ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दो और दिनों का समय दिया है, जो बुधवार आधी रात को खत्म होगा।
यहां बता दें कि अगर इन दोनों नेताओं की बातचीत नाकाम रहती है तो ऐसे में संसद भंग करने की नौबत आ सकती है। ऐसे में इसकी संभावना काफी ज्यादा है कि करीब एक साल के अंदर चौथी बार चुनाव की स्थिति पैदा हो जाए। दरअसल इससे पहले पिछले दोनों चुनावों की तरह पिछले महीने के चुनाव में भी किसी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था।
यहा बता दें कि इससे पहले बेनी गैंट्ज यह बार-बार कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण वह नेतन्याहू के साथ सरकार में शामिल नहीं होंगे। लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण बिगड़े हालात और अपने गठबंधन में दरार की आशंका को देखते हुए गैंट्ज ने पिछले महीने के आखिर में अपना रुख बदल दिया था। इसके बाद उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए संयुक्त सरकार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए नेतन्याहू का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। हालांकि, इस फैसले के लिए गेंट्ज को अपने समर्थकों की ओर से भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसी का नतीजा रहा कि उनका गठबंधन इस विरोध के चलते बिखर गया। गेंट्ज के उठाए कदम के बाद गठबंधन के करीब आधे सदस्यों ने खुद को इससे अलग कर लिया।
यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस्राइल में अब तक कोरोना वायरस से करीब 11,800 लोग प्रभावित हो चुके हैं। वहीं, इस खतरनाक बीमारी के चलते कम से कम 117 लोगों की मौत हो गई है। ऐसे में कोरोना वायरस के संकट के चलते देश की अर्थव्यवस्था भी ठहर गयी है।