विधेयक पर रविवार सुबह चर्चा हुई। लगभग 30 घंटे की लगातार बहस के बाद मत विभाजन किया गया। स्थानीय अखबार की खबर के अनुसार, चर्चा के दौरान राजनीतिक सत्ता पर न्यायिक अंकुश लगाने के पक्ष और विपक्ष में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए।
इस्राइल की संसद ने सोमवार को एक विवादास्पद कानून को मंजूरी दे दी। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, इसे राजनीतिक शक्ति पर न्यायिक अंकुश को रोकने के मकसद से बनाया गया है। इसे देश की न्याय प्रणाली को फिर से आकार देने की प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की योजना के अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 64 वोट पड़े। विपक्ष ने वोटिंग का बहिष्कार किया। इस वजह से विधेयक के विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा। यह सरकार के न्यायिक सुधार में पारित होने वाला पहला प्रमुख विधेयक है।
कई प्रयास विफल रहे थे
विधेयक में संशोधन करने या विपक्ष के साथ व्यापक प्रक्रियात्मक समझौता करने के लिए इस्राइल की संसद में अंतिम समय में किए गए कई प्रयास विफल रहे थे। कानून की कठोरता को कम करने के लिए रखे गए विचारों का भी कोई नतीजा नहीं निकला था। प्रधानमंत्री नेतन्याहू और गठबंधन के प्रमुख नेताओं ने इसे लेकर चर्चा भी की थी, लेकिन हर बार कोई नतीजा नहीं निकलता था।
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30 घंटे की लगातार बहस के बाद मत विभाजन
इस बीच विधेयक पर रविवार सुबह चर्चा हुई। लगभग 30 घंटे की लगातार बहस के बाद मत विभाजन किया गया। स्थानीय अखबार की खबर के अनुसार, चर्चा के दौरान राजनीतिक सत्ता पर न्यायिक अंकुश लगाने के पक्ष और विपक्ष में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। कानून के मुताबिक, अब अदालतें कैबिनेट और मंत्रियों के फैसलों की तर्कसंगतता पर किसी भी तरह की पड़ताल या जांच के आदेश नहीं दे पाएंगी।